रांची(RANCHI): झारखंड में कांग्रेस के अंदर बवाल मचा है. प्रदेश कमिटी विस्तार के साथ ही अध्यक्ष पर सवाल खड़ा होने लगा. अब तक सब कुछ अंदर खाने चल रहा था. लेकिन बांगाल चुनाव के परिणाम के बाद अब खुल कर अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और प्रदेश प्रभारी से उन्हे पद से हटाने तक की बात कर डाली. एक के बाद एक दो चिट्ठी कांग्रेस कोटे के मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लिखी. जिसे अपने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया है. जिससे इशारा साफ है कि संगठन में तालमेल की कमी है. अध्यक्ष और नेताओं में समन्वय स्थापित नहीं हो पाया. जिसका खामियाजा है कि मंत्री खुल कर मोर्चा खोल दिया.
राधा कृष्ण किशोर ने इस चिट्ठी में कई सवाल खड़े किए है. जिसका जवाब भी शायद अध्यक्ष के पास मौजूद नहीं होगा. 8 बिन्दु पर गहन समीक्षा के बाद राधा कृष्ण ने पत्र में चर्चा की.जिसमें JTET भाषा विवाद से लेकर हजारीबाग में रेप और दूसरी तीन लोगों की हत्या के मामले को उठाया. साथ ही महिला आरक्षण बिल को लेकर भी कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व को घेरा है. इसके अलावा संगठन में कितने नेताओं के परिवार के लोगों को जगह दी गई. इसका जवाब मांगा है. आखिर में लिखा है कि मुझे नहीं लगता की कुछ पत्र में गलत है अगर गलत लगता है तो जो भी निर्णय हो वह स्वीकार योग्य होगा.
अब इस पत्र में जिस बिन्दु पर पार्टी पर सवाल खड़ा किया गया. संगठन ने सभी से दूरी बनाई है. ना ही विष्णुगढ़ के मामले में कांग्रेस सक्रिय दिखी और ना ही हजारीबाग में अल्पसंख्यक तीन बच्चों की हत्या पर ऐसे में राधा कृष्ण किशोर ने उस नस को पकड़ कर सवाल किया है. जिसकी बात कांग्रेस के ही सभी नेता करते है. महिला सुरक्षा से लेकर अल्पसंख्यक के अधिकार पर पूरी कांग्रेस पार्टी मीडिया में सवाल करती है. लेकिन जब राज्य में घटना हुई तो फिर चुप्पी क्यों साधा गया.
अब इस पत्र पर फिलहाल कांग्रेस प्रदेश कमिटी या अध्यक्ष की ओर से कुछ भी बयान देने से परहेज किया जा रहा है. लेकिन आने वाले दिनों में प्रदेश कमिटी में इसका असर गहरा दिख सकता है. कांग्रेस में मंत्री के बाद कई नेता संगठन पर सवाल खड़ा कर रहे है. जिसे संभालना प्रदेश प्रभारी को भी मुश्किल हो सकता है.