धनबाद(DHANBAD): पश्चिम बंगाल में चुनाव के पहले ही बवाल मचा हुआ है. आरोप -प्रत्यारोप के सिलसिला तेज हो गया है. राष्ट्रपति के कथित अपमान का मुद्दा भी उठा है. केंद्र सरकार इसे गंभीरता से लेते हुए बंगाल सरकार से जवाब -तलब किया है. प्रधानमंत्री ने रविवार को एक बार फिर कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल समुदाय के बड़े उत्सव में शामिल होने के लिए बंगाल गई थी. लेकिन राष्ट्रपति का सम्मान करने के बजाय तृणमूल कांग्रेस ने इस पवित्र और महत्वपूर्ण आयोजन का बहिष्कार किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा था
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति आदिवासी समुदाय से आती हैं और आदिवासी समुदाय के विकास के लिए हमेशा चिंतित रहती हैं. . तृणमूल कांग्रेस ने उस आयोजन को कुप्रबंधन के भरोसे छोड़ दिया। यह न केवल राष्ट्रपति का अपमान है, बल्कि भारत के संविधान का भी अपमान है. यह संविधान की भावना का अपमान है. यह लोकतंत्र के महान परंपरा का भी अपमान है. उन्होंने कहा कि देश में कहावत है कि जो व्यक्ति चाहे, कितना भी शक्तिशाली क्यों ना हो, अंततः अहंकार से ही उसका पतन होता है.
ममता दीदी का सवाल -इसी मतदाता सूची पर पीएम बने हैं ,इस्तीफा दें
इधर, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में चल रही विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटाए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर यही मतदाता सूची 2024 में थी, जिसके आधार पर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तो फिर अब इस सूची से लोगों को वोट देने से क्यों रोका जा रहा है? कोलकाता में एक धरना मंच से बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अगर मतदाता सूची में गड़बड़ी हो रही है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे पहले इस्तीफा देना चाहिए ,क्योंकि वह भी इसी मतदाता सूची के आधार पर चुने गए थे.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी मांगना चाहिए इस्तीफा
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगना चाहिए। ममता दीदी ने कहा कि चुनाव से पहले मतदाता सूची से नाम हटाने की कार्रवाई लोकतंत्र के लिए खतरनाक है. मुख्यमंत्री ने राज्यपाल की अचानक इस्तीफे पर पर भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का कार्यकाल अभी 3 साल बाकी था. फिर अचानक 5 मार्च को उन्हें पद क्यों छोड़ना पड़ा. ममता बनर्जी ने इस मामले की जांच की मांग की है. इस दौरान उन्होंने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के पिछले साल जुलाई महीने में दिए गए इस्तीफा का भी जिक्र किया।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
