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खत्म हुआ राजनीतिक बनवास: झंझावातों से उबर कर" सिंह मेंशन" फिर शिखर पर, पत्नी विधायक और पति बने मेयर

खत्म हुआ राजनीतिक बनवास: झंझावातों से उबर कर" सिंह मेंशन" फिर शिखर पर, पत्नी विधायक और पति बने मेयर

धनबाद(DHANBAD):झंझावातों से लड़कर "सिंह मेंशन" एक बार फिर शिखर पर पहुंच गया है. हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है. इसके पहले भी कई बार सिंह मेंशन को परेशानियों ने घेरा. लेकिन धैर्य और साहस से उन परेशानियों से सिंह मेंशन उबरता रहा है. कहा जा सकता है कि सिंह मेंशन का ऐसा इतिहास बन गया है.8 साल से अधिक समय तक जेल जीवन बिताने वाले झरिया के पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह जब जेल से बाहर निकले, तो लगता है, मेयर की कुर्सी उनका इंतजार कर रही थी और वह अब धनबाद के पहले नागरिक बन गए है. यह अलग बात है कि भाजपा से बागी बनकर जब वह मैदान में उतरे ,तो भी उन्हें बहुत कुछ सहना और देखना पड़ा. फिर भी अपने निर्णय पर अडिग रहे. समर्थकों का दबाव उन पर था. 

पत्नी रागिनी सिंह चुनाव प्रचार से बिल्कुल दूर रही

पत्नी भाजपा से विधायक है. ऐसे में कई सवाल उठाए गए. पत्नी रागिनी सिंह चुनाव प्रचार से बिल्कुल दूर रही, लेकिन इन सबसे बेखबर संजीव सिंह और उनके समर्थक चुनाव प्रचार में डटे रहे. भाजपा नेताओं ने जहरीली बातें कही, फिर भी कोई असर नहीं हुआ. वैसे सरल स्वभाव के संजीव सिंह बहुत जल्दी किन्हीं बातों पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं. इस चुनाव में भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया.नतीजा हुआ कि धनबाद की जनता ने उन्हें हाथों-हाथ ले लिया. यह जीत कोई साधारण जीत नहीं है, क्योंकि पहली बार नगर निगम के चुनाव में किसी प्रत्याशी को एक लाख से अधिक मत मिले है. संजीव सिंह की यह जीत केवल एक विजय नहीं है, बल्कि यह जीत अपनी आंचल में कई राजनीतिक संदेशों को छुपाए हुए हैं. समय के साथ राजनीतिक संदेश दिखेंगे. 

कोयलांचल की राजनीति में उनकी दमदार वापसी

झरिया से अपने विधायक कार्यकाल के दौरान लगभग आधे समय तक वह जेल में रहे. उसके बाद हुए चुनाव में उनकी पत्नी भाजपा से उम्मीदवार बनी. लेकिन चुनाव हार गई. यह समय 2019 का था. फिर 2024 का समय आया. समय ने पलटा खाया और संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह झरिया से विधायक बन गई. कहा जा सकता है कि इस जीत के साथ ही संजीव सिंह का बनवास खत्म हो गया है. कोयलांचल की राजनीति में उनकी दमदार वापसी हुई है. यह वापसी यह संकेत दे रही है कि धनबाद के 6 विधानसभा क्षेत्र में से 5 में संजीव सिंह की पहुंच बढ़ेगी. धनबाद, झरिया विधानसभा तो पूरी तरह से निगम क्षेत्र में है. सिंदरी विधानसभा क्षेत्र के चार वार्ड, बाघमारा विधानसभा क्षेत्र के आठ वार्ड नगर निगम क्षेत्र में पड़ता है. टुंडी विधानसभा क्षेत्र का एक वार्ड भी धनबाद नगर निगम क्षेत्र में पड़ता है. इस हिसाब से अगर देखा जाए तो धनबाद के पांच विधानसभा क्षेत्र में अब संजीव सिंह का सीधा प्रभाव दिखेगा .मतलब साफ है कि संजीव सिंह की राजनीति अब झरिया से निकलकर धनबाद जिले में बढ़ेगी और इससे राजनीतिक समीकरण में आगे उलट फेर भी हो सकते है.

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो

Published at: 01 Mar 2026 04:56 AM (IST)
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