दुमका (DUMKA):गोड्डा की राजनीति में “सनातन” अब धर्म नहीं, बल्कि गेरुआ नदी के सनातन घाट का प्रतीक बन गया है. यहीं से उठते अवैध बालू खनन के धुएं ने सत्ता के गलियारों को धुंधला कर दिया है. हैरानी यह कि जिस मुद्दे पर भाजपा अक्सर मुखर रहती है, वहां वह खामोश है और सत्ता के सहयोगी दल ही आमने सामने आ गए है.
खुला टकराव: प्रदीप का पत्र, संजय का पलटवार
कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने पथरगामा के सनातन घाट से हो रहे बालू के अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए उपायुक्त को पत्र लिखकर आंदोलन की चेतावनी दी. पत्र सार्वजनिक होते ही राजद विधायक सह मंत्री संजय प्रसाद यादव ने तीखा पलटवार किया, और मामला सीधे सियासी जंग में बदल गया.
6 महीने नहीं, 7 साल से लूट, जिम्मेदारी किसकी?
प्रदीप यादव जहां 6 महीने से सनातन घाट से बालू के अवैध कारोबार की बात कर रहे हैं, वहीं मंत्री संजय यादव का दावा है कि यह खेल 7 वर्षों से चल रहा है. उनका सीधा सवाल है कि अगर इतना बड़ा खेल था, तो अब तक चुप्पी क्यों? उन्होंने यह भी कहा कि पहले रात के अंधेरे में होता था, अब दिन में खुलेआम हो रहा है यानी सिस्टम पूरी तरह बेनकाब है.
जिले का हर कोना माफियाओं के कब्जे में
मंत्री ने आरोप लगाया कि सिर्फ सनातन घाट नहीं, बल्कि गोड्डा के हर इलाके पोड़ैयाहाट, महगामा विधान सभा क्षेत्र में खनिज संपदा का अवैध खेल जारी है. हंसडीहा मार्ग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रोज हजारों ट्रक खनिज लेकर गुजरते हैं, लेकिन कोई रोकने वाला नहीं है.
कमिशन का काला सच, सब तक पहुंचता है हिस्सा!
सिस्टम को बेनकाब करते हुए मंत्री संजय यादव ने कहा कि वर्तमान हो या पूर्व, हर जनप्रतिनिधि तक कमिशन पहुंचता है उन्होंने पूर्व विधायक अमित मंडल को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे सार्वजनिक रूप से अपनी “ईमानदारी” साबित करें. साथ ही उन्होंने कहा कि पूरे मामले कि जांच कराई जाए और अगर उनका नाम आता है तो उनपर भी कार्रवाई हो.
भाजपा की चुप्पी, रणनीति या मजबूरी?
इस पूरे घमासान में भाजपा की खामोशी भी सवालों के घेरे में है.कारण साफ है यहां “सनातन” धार्मिक नहीं, बल्कि खनन माफिया से जुड़ा मुद्दा है, जहां आरोप सत्ता के भीतर ही घूम रहे है.
अभी रुका खेल, लेकिन कब तक?
प्रदीप यादव के मुद्दा उठाने के बाद फिलहाल सनातन घाट से बालू उठाव बंद बताया जा रहा है. स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह ठहराव स्थायी होगा या नहीं इस पर संदेह बना हुआ है.
आखिर कब जागेंगे बाकी जनप्रतिनिधि!
झारखंड की पहचान उसकी खनिज संपदा है, लेकिन यही संपदा अब लूट का जरिया बनती जा रही है. गोड्डा में उठी आवाज ने पूरे राज्य के सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए है. क्या बाकी विधायक भी आगे आएंगे? या फिर यह मुद्दा भी सियासी बयानबाजी में दब जाएगा?
सनातन घाट बना सिस्टम की सच्चाई का आईना
गोड्डा का सनातन घाट अब सिर्फ एक नदी घाट नहीं रहा, बल्कि सत्ता, सिस्टम और माफिया के गठजोड़ का आईना बन गया है जहां हर बयान के साथ नई परत खुल रही है और जनता जवाब मांग रही है.
रिपोर्ट-पंचम झा