धनबाद(DHANBAD): कोयलांचल का यूपी कनेक्शन पुलिस नहीं तोड़ पा रही है. हिल टॉप आउटसोर्सिंग के लाइज निंग ऑफिसर पर फायरिंग में भी यूपी कनेक्शन सामने आया है. अपराधी बुलाए जाते हैं, घटना को अंजाम देते हैं, दहशत फैलाते हैं और फिर निकल जाते है. हालांकि हाल की घटनाओं में बिहार के अपराधियों के नाम भी सामने आते रहते है. कुसुंडा में संचालित हिलटॉप आउटसोर्सिंग कंपनी के लाइजनर ऑफिसर राजेश यादव पर फायरिंग करने वाले भी यूपी के ही थे. शूटरों को अमन सिंह और आशीष रंजन उर्फ छोटू सिंह ने धनबाद बुलाया था.
लोकल लड़के करते है रैकी, देते है फ़ोन नंबर
इस घटना के बाद पुलिस अंधेरे में हाथ पैर मार रही थी लेकिन सुराग हाथ नहीं लग रहे थे. इसी बीच धनबाद के तीन लड़कों ने राजेश यादव के भाई को फोन किया और रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी. फोन आने के बाद ही पुलिस को कुछ पुख्ता सुराग मिले और पुलिस जांच में जुट गई. पुलिस ने इस संबंध में रेकी करने वाले लोयाबाद के सागर नोनिया को गिरफ्तार किया. सागर ने पुलिस को बताया कि उसके साथ रेकी करने वालों में लोयाबाद का विजय सिंह और प्रवीण रवानी भी शामिल थे. तीनों ने मिलकर ही फायरिंग के बाद राजेश यादव के भाई को फोन कर धमकाया था. पुलिस द्वारा सागर को जेल भेज दिया है, बाकी दो अन्य की तलाश में जुटी हुई है. पुलिस यह मानकर चल रही है कि घटनाओं को अंजाम सुपारी देकर दिलवाया जा रहा है. घटना के तुरंत बाद अपराधी इलाका छोड़ देते है. कई घटनाओं में यह बात भी सामने आई है. जानकार बताते हैं कि अपराधी कोयलांचल में आते हैं, उन्हें ठहरने की व्यवस्था लोकल लिंक करता है, हथियार भी वही उपलब्ध कराते हैं, घटना को अंजाम देने के बाद भागने का रास्ता भी दिखाते है.
खली हाथ आते है और खली हाथ ही चले जाते है
अपराध करने के बाद शूटर हथियार यही छोड़ कर चले जाते है. इस वजह से पुलिस को भी परेशानी होती है. कोयलांचल में बिहार और यूपी के कनेक्शन को पुलिस नहीं तोड़ पा रही है और यही वजह है कि अपराध की घटनाएं लगातार हो रही है. यहाँ एक ऐसा तबका तैयार हुआ है, जिसके खून में रंगदारी वसूलना समा गया है. यह तबका ना कोई धंधा करता है और ना कोई व्यवसाय, लेकिन उनकी ठाट बाट और दबंग ता अलग अंदाज की होती है. जेल जाते हैं, वहां से भी वसूली करवाते हैं ,जेल से बाहर निकलते हैं तो फिर रंगदारी शुरू कर देते है. ऐसे में कोयलांचल का धंधा व्यवसाय चौपट हो रहा है. कोलियरी इलाकों में मजदूरों के धौडो की अगर एक साथ जांच पड़ताल कर दी जाए तो कई शातिर अपराधी पकड़ में आ सकते हैं, हथियार भी बरामद किए जा सकते है. लेकिन विशेष टास्क फोर्स बनाकर ऐसी कभी कार्रवाई नहीं हुई. मजदूर धौड़ो को भी कभी खंगाला नहीं गया. नतीजा है कि अपराधी आते हैं, शरण लेते हैं, अपराध करते हैं, सुपारी का पैसा लेते हैं और निकल जाते है.
