✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से हो रही सूकरों की मौत, जिला प्रशासन अलर्ट मोड़ में 

BY -
Ranjana Kumari
Ranjana Kumari
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 8:15:39 AM

पूर्वी सिंहभूम(PURVI SINGHBHUM)  अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के कारण बड़ी संख्या में सूअरों की मौत होने से जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड़ में है.देश के पूर्वोत्तर राज्य असम में असामान्य रूप से सूकरों की मृत्यु के लिए अफ्रीकन स्वाइन फीवर बीमारी की पुष्टि हुई है. झारखण्ड सुकर प्रजनन प्रक्षेत्र, कांके रांची में इस बीमारी से सूकरों की मृत्यु की पुष्टि ICAR,NISHAD, BHOPAL संस्थान द्वारा भेजे गए नमूनों से यह स्पष्ट हुआ है.इस बीमारी से मनुष्यों में  वायरस फैलने का चांस जानवरों के द्वारा नहीं रहता है.फिर भी जिला प्रशासन ने इसके फैलाव को रोकने के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है.


 क्या है अफ्रीकन स्वाईन फीवर या अफ्रीकन सूकर ज्वर रोग ?

1. यह एक विषाणुजनित रोग है

2.  यह छूआ छूत का रोग है, जिसमें बीमार सूकर के सम्पर्क से स्वस्थ्य सूकर में रोग फैलता है साथ ही बीमार सूकर के मलमूत्र एवं दूषित दाना पानी से भी  रोग फैलने की संभावना बानी रहती है.

3.  सूकर पालक / सूकरों के देख भाल करने वालों के माध्यम से भी यह रोग फैलता है.

4.  यह रोग सिर्फ सूकरों को ही  संक्रमित करता है. 

5.    सूकर के अलावा यह किसी और पशुओं या मनुष्यों को संक्रमित नहीं करता है.

6.   इस रोग से सूकरों में असामान्य या अत्यधिक संख्या में आकस्मिक मृत्यु  भी होने की संभावना बानी रहती है.

 स्वाइन फीवर  के प्रमुख लक्षण

1.  तीव्र ज्वर
2  उल्टी एवं दस्त (कभी- कभी खूनी दस्त)
3 . भूख न लगना या खाना छोड़ देना
4. कान, छाती, पेट एवं पैरों में लाल चकत्तेदार धब्बा 
5. लड़खड़ाते हुए चलना
6 .1 से 14 दिनों में मृत्यु 
7. किसी-किसी में मृत्यु के उपरान्त मुख एवं नाक से रक्त का स्राव होना. 

 इस रोग से बचाव व रोकथाम के उपाय 

1.  इस रोग लाइलाज है 
2. सतर्कता ही इस रोग से बचाव है  

क्या ना करें


1 • सूकर फार्म में अनावश्यक आवाजाही पर रोक लगायें.
2 . संक्रमित क्षेत्र में सूकरों की खरीद-बिक्री ना करें. 
3 • संक्रमित क्षेत्र में सूकर मांस की बिक्री पर रोक 
4 • सूकर के बाड़े में अन्य जाति के पशुओं के आवाजाही पर रोक

क्या करें

1.  यदि पशुपालक सुकरों को होटल जूठन अवशेष भोजन के रूप में देते हैं, तो वैसी स्थिति में भोजन को 20 मिनट उबालकर दें

2. मृत सूकर संक्रमित भोजन एवं मल को गहरा गड्ढा खोदकर चूने के साथ दफना दें

3.  सूकर बाड़े की सफाई प्रतिदिन एन्टीसेप्टिक / कीटाणुनाशक घोल से करें   

4 .  असामान्य या अत्यधिक संख्या में मृत्यु होने पर निकटतम पशुचिकित्सालय में सूचना दें

5.     बाह्य परिजीवी (चमोकन आदि) पर नियंत्रण करें. 

6.  पशुचिकित्सा पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को रोग नियंत्रण क्रियाकलापों में सूकर पालक अपना बहुमूल्य सहयोग दें 

7 . ”रोकथाम के उपाय अपनाकर, रोग के प्रसार रोकने में अपना बहुमूल्य सहयोग दें, जिला प्रशासन पूर्वी सिंहभूम द्वारा जनहित में जारी

Tags:News

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.