धनबाद(DHANBAD):ट्रेन के डिब्बों अथवा रेलवे स्टेशन पर स्लोगन लिखे मिलते हैं, कि यात्री अपने समान की रक्षा स्वयं करें, लेकिन अब रेलवे का ये स्लोगन अब कोई काम नहीं आएगा. अगर ट्रेन में चढ़े किसी अनधिकृत व्यक्ति की ओर से किसी यात्री का सामान उठा लिया जाएगा, चोरी कर लिया जाएगा, तो इसकी जिम्मेवारी से रेलवे बच नहीं सकता है.
यात्री अपने समान की रक्षा खुद करें, स्लोगन अब नहीं आ रहा काम
अब तक तो ट्रेन में स्नैचिंग, चोरी, लूटपाट और सामान गायब होने की वारदात पर रेलवे ये कहकर पल्ला झाड़ लेता था, कि सवारी पर ही सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है. लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा. राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने ऐसे मामले पर एक बड़ा फैसला दिया है. आयोग ने कहा है कि ट्रेन में घुसे अनधिकृत व्यक्ति की ओर से चोरी, लूटपाट की जाती है, और वारदात से यात्री को नुकसान होता है, तो इसकी भरपाई की जिम्मेवारी रेलवे की होगी. रेलवे अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता.
ट्रेन में सामान की चोरी और छिनतई होने पर केलवे नहीं झाड़ सकता है पल्ला
आयोग ने ट्रेन में महिला का पर्स छीनने की एक घटना में रेलवे को ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया है .रेलवे को पीड़िता को मानसिक प्रताड़ना के तौर पर 50 हजार रुपये और केस के खर्च के लिए 1 लाख भी देने होंगे. मामला ये है कि 2016 में एसी कोच में बीकानेर से दिल्ली जा रही यात्री का पर्स छीन लिया गया था. उसके बाद वो महिला उपभोक्ता फोरम में गई थी. जिला और राज्य उप भोक्ता फोरम ने भी पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया था .आयोग ने ये टिप्पणी की है कि रिजर्व डिब्बे में अनधिकृत व्यक्ति का प्रवेश रेलवे की लापरवाही का नतीजा है.
रिपोर्ट-सत्यभूषण सिंह
