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पारस HEC हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने पेश किया मिशाल ,105 वर्ष की बुजुर्ग महिला के पेट से निकाला ट्यूमर

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 7:38:59 AM

रांची(RANCHI): डॉक्टरों को भगवान कहा जाता है.जो गंभीर से गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों का इलाज कर उन्हें मौत से मुंह से वापस ले आते है.यह कहावत पारस HEC अस्पताल के चिकित्सकों ने फिर एक बार साबित कर दिया है. चिकित्सकों ने एक 105 वर्ष की वृद्ध महिला के पेट से ट्यूमर निकाल कर नई जिंदगी दी है.

कई अस्पताल से हो चुकी थी वापस

हजारीबाग की रहने वाली एक वृद्ध  महिला पेट दर्द से परेशान थी.कई जगहों अस्पतालों में उनके परिजनों ने उनका इलाज कराया लेकिन उन्हें पेट कि समस्या से छुटकारा नहीं मिला.कई अस्पताल के डॉक्टरों ने तो जवाब दे दिया कि इनका अब ऑपेरशन नहीं हो सकता.
महिला के परिजन पारस HEC अस्पताल के डॉक्टर मेजर रमेश दास से मिले.डॉक्टर मेजर ने सबसे पहले सिटी स्कैन रिपोर्ट को देखा जिसमें पाया कि महिला को लिवर हाईडेटिक सिस्ट हो गया है.सिस्ट काफी बड़ा रूप ले चुका है जिससे लिवर का 80 %हिस्सा सिस्ट में बदल गया.सिस्ट इतना बढ़ा हुआ था कि कुछ दिन और महिला का ऑपेरशन नहीं होता तो पेट चिर कर बाहर निकल जाता.

सबसे बड़ी समस्या थी एनेस्थेसिआ दिए जाना.

डॉक्टर मेजर रमेश दास ने परिजनों से सलाह कर ऑपेरशन के द्वारा सिस्ट को  निकालने की तैयारी शुरू कर दी. महिला मरीज के ऑपरेशन के  लिए सबसे बड़ी समस्या थी उनको एनेस्थेसिआ दिए जाना.  क्यूँकि महिला की उम्र काफ़ी  ज़्यादा थी और इस उम्र के मरीज़ों को एनेस्थीसिया देना बहुत बड़ी चुनौती थी. कभी कभी इस उम्र में एनेस्थीसिया ख़तरनाक भी  साबित हो जाता है. लेकिन  एनेस्थीसिया हेड डॉ.संजय वर्मा और उनकी टीम ने एक बहुत बड़ा और गंभीर निर्णय लिया और 105वर्षीय महिला मरीज को एनेस्थेसिआ देने का फैसला किया.

महिला और उनके परिजन खुश

डॉक्टर (मेजर)रमेश दास और डॉ.ओम प्रकाश ने महिला मरीज की सफल सर्जरी की और सिस्ट को महिला के शरीर से बाहर  निकाला.महिला अब खतरे से बाहर है.महिला अब सहज महसूस कर रही थी. महिला ने इस असह्य पीड़ा से निजात दिलाने केलिए पारस अस्पताल और चिकित्सकों के प्रति खुशी जताया है. अस्पताल से उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है.

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