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बोकारो मुठभेड़ के बाद नक्सलियों में दहशत! भाकपा माओवादी संगठन की सदस्य सुनीता मुर्मू ने किया आत्मसमर्पण

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 4:40:36 AM

बोकारो (BOKARO) : झारखंड में नक्सलियों के खात्मे को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन एक्शन मोड में है. नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई भी की जा रही है. इसी कड़ी में  भाकपा माओवादी संगठन की सदस्य  सुनिता मुर्मू उर्फ लीलमुनी मुर्मू ने  बोकारो पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आज  आत्मसमर्पण कर दिया.

21 अप्रैल को मुठभेड़ में 8 नक्सली हुए थे ढेर

आपको बता दें कि  21 अप्रैल को लूगु पहाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन डाकाबेड़ा चलाया था. इस बीच सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. जिसमें एक करोड़ के नक्सली इनामी विवेक दा सहित आठ हार्ड कोर नक्सलियों को पुलिस ने मार गिराया था. जबकि 8 से 10 नक्सली भागने में सफल हो गए थे.

डीजीपी अनुराग गुप्ता ने नक्सलियों को दी थी चेतावनी 

मुठभेड़ के बाद  बोकारो पहुंचे डीजीपी अनुराग गुप्ता ने कहा था कि जो बचे हुए नक्सली हैं, उन्हें मैं कहना और हिदायत देना चाहता हूँ कि राज्य का जो सरेंडर पालिसी है, उसे अपनाते हुए शांति के मार्ग पर लौट आये, अन्यथा मारे जाएंगे. जो सरेंडर करेंगे उसे ओपन जेल में रखेंगे. उन्हें पैसा देंगे, उनके बच्चों को पढ़ाई-लिखाई कराएंगे. उनकी कानूनी लड़ाई लड़ने में मदद करेंगे. परंतु समझाने के बाद भी नहीं मानेंगे तो उनका भी वही हस्र होगा जो 21 अप्रैल को 8 नक्सलियों का हुआ है. जो भी हिंसा के रास्ते पर हैं वे जल्दी लौटकर मुख्यधारा में आवे नहीं तो उनके लिए कोई जगह नहीं है.

पुलिस के बढ़ते दबाव में आकर सुनीता मुर्मू ने किया आत्मसमर्पण

माना जा रहा है कि पुलिस के बढ़ते दबाव और राज्य सरकार की सरेंडर पॉलिसी से प्रभावित होकर सुनीता मुर्मू ने आत्मसमर्पण किया है. सुनीता मुर्मू ने स्वीकार किया कि वे गलत रास्ते पर चली गई थी. उसने अन्य नक्सलियों से भी आत्मसमर्पण करने की अपील की. उसने बताया, वह तीन साल गिरिडीह जेल में रह चुकी है. कई थानों में उसके ऊपर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है.

सुनीता मुर्मू  को झारखंड सरकार की सरेंडर पॉलिसी के तहत मिलेंगे सभी लाभ 

वहीं  सुनीता मुर्मू  के सरेंडर के बाद अपर समाहर्ता ने कहा कि, समाज ने भटके हुए नक्सलियों को फिर से मुख्यधारा से जड़ने के लिए झारखंड सरकार ने वर्ष 2018 में बहुत सरेंडर पॉलिसी लाई. उसके तहत नक्सलियों को पैसे, घर, जमीन दिया जाता है. रोजगार व्यवसाय की व्यवस्था करने में सरकार सहयोग करती है ताकि वे अपना और परिवार का भरण पोषण कर सके. सुनीता को ये सभी लाभ दिया जाएगा.

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