रांची (RANCHI) नवरात्रि के आठवें दिन माता दुर्गा के महागौरी के रूप में स्वरूप में पूजा जाता है. नवरात्रि मुख्य रूप से शक्ति की आराधना करने का दिन होता है. शास्त्रों में कहा गया है कि नवरात्रि के 9 दिनों तक मां दुर्गा धरती पर विचरण करती हैं और अपने भक्तों की मनोकामना को पूरा करती हैं नवरात्रि के पावन दिनों में भक्ति और निष्ठा के साथ मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों का पूजन करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामना ओं को भी माता पूर्ति करती है नवरात्रि के 9 दिनों में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व होता है अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी या फिर महाअष्टमी भी कहा जाता है.
शाम 3 बजे तक महाअष्टमी तिथि में कर सकते हैं पूजा
महा अष्टमी पूजा की तिथि 2 अक्टूबर शाम 6 बजकर 47 मिनट से प्रारम्भ हुआ,और 3 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 37 मिनट पर खत्म हो जाएगा.
पूजा विधि
अष्टमी तिथि को मां गौरी के स्वरूप में पूजा की जाती है. माता गौरी की पूजा करते समय पीले या गेहूंआ रंग के वस्त्र को धारण करने से माता अधिक प्रसन्न होती हैं. माता को चंपा और चमेली के पुष्प से पूजा करने पर माता अत्यधिक प्रसन्न होती हैं. भोग में खीर माता गौरी को अधिक प्रसन्न है, इसलिए भक्तों के द्वारा खीर का भोग लगाया जाता है.
महाअष्टमी का व्रत कौन_कौन करता है
पुरोहित अरूण मिश्रा के मुताबिक़ महाअष्टमी व्रत शादीशुदा महिलाओं के साथ-साथ अविवाहित लड़कियां भी मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए कर सकती हैं . शास्त्रों के मुताबिक माता सीता ने श्री राम की प्राप्ति के लिए देवी महागौरी की ही पूजा की थी. माता गौरी को विशेष फल के रूप में नारियल चढ़ाया जाता है. माता गौरी का प्रिय रंग सफेद है.
