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स्कूली बच्चों की थाली से गायब हो रहे हैं पौष्टिक आहार, भोजन की जगह मिलता है फटकार, देखिए

BY -
Purnima
Purnima
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 3:21:01 PM

बोकारो (BOKARO) : मिड दी मील को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है. सरकारी स्कूलों में बच्चों के मील में पौष्टिक आहार के लिस्ट बनाए जाते हैं. दूध,फ्रूट्स, और अंडा जैसी कई अन्य खाने की चीजों को मील में जोड़ने के वादे किए जाते हैं, पर इनमे से शायद ही कोई चीज बच्चों को मिलती है. कई बार तो बच्चों के मिड डे मील खाने के बाद बीमार तक होने की खबर सामने आई है. सूत्रों की माने तो अधिकांश स्कूलों पर बच्चों को गुणवत्ताहीन भोजन वितरित किया जा रहा है. जबकि बच्चों को पौष्टिक आहार देने हेतु शासन की ओर से मैन्यू भी निर्धारित किया गया है, लेकिन दोपहर का भोजन बनाने एवं वितरण करने वाले लोग मैन्यू को दरकिनार कर गुणवत्ताहीन भोजन ही बच्चों को परोस रहे हैं. वहीं कुछ बच्चों की माने तो उनके थाली में भोजन सिर्फ एक बार ही दिया जाता है, दोबारा मांगने पर भोजन की जगह फटकार मिलती है.   

क्या कहते हैं होसिर के पूर्व मुखिया घनश्याम राम--

इस संबंध में होसिर के पूर्व मुखिया घनश्याम राम ने कहा कि बच्चों को पौष्टिक व संतुलित आहार उपलब्ध कराने के लिए सरकारी स्कूलों में चालू मिड-डे-मील (एमडीएम) योजना नियमित जांच न होने से दम तोड़ रही है. स्कूलों में एमडीएम के तहत बच्चों को मानकों के अनुरूप पौष्टिक थाली मुहैया नहीं हो पा रही है. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के बच्चों के लिए एमडीएम की व्यवस्था है. इसके लिए डाइट तो तय है कि रोजाना के लिए अलग-अलग मैन्यू तक की व्यवस्था है. बच्चों को भोजन में हरी सब्जी, दालें, अंडा तक दिए जाने का प्रावधान है,लेकिन अधिकारियों की सुस्ती के चलते मैन्यू सही तरीके से फॉलो नहीं होता है. गुणवत्ता से समझौता बच्चों की सेहत पर असर डालना है. अधिकारियों के उदाशीनता के कारण खाद्यान्न की गुणवत्ता, तय मैन्यू का पालन आदि स्थिति की जांच नहीं हो पाती है. बेहतर हो, इसकी रूटीन चेकिंग की जाए.   

रिपोर्ट: संजय कुमार 

Tags:Nutritious fooddisappearingplates of school childrenschoolchildrenreprimandedMIDDAYMEALTHENEWSPOST

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