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झारखंड में अब होगा "झारखंड" के लिए आंदोलन, क्या भाजपा अब पकड़ेगी नई राह, पढ़िए क्यों उठ रहे सवाल !

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 9:15:34 AM

धनबाद (DHANBAD) : तो झारखंड में क्या एक बार फिर बृहद झारखंड का आंदोलन शुरू होगा? क्या झामुमो को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन और उनके परिवार के लोग इस आंदोलन की अगुवाई करेंगे? क्या दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने जो कर दिखाया, उस लकीर से आगे कोई निकल पाएगा? शिबू सोरेन ने तो 18 जिलों को मिलाकर झारखंड निर्माण की दिशा में एक इतिहास रच दिया है. लेकिन अब 28 जिलों को मिलाकर बृहद झारखंड के लिए "शिबू सोरेन सेना"  का गठन हुआ है.  मतलब भाजपा में रहते हुए शिबू सोरेन के नाम पर राजनीति की क्या कोई बड़ी रणनीति बनाई गई है? दरअसल, जादूगोड़ा अस्पताल चौक पर बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र और भाजपा नेता बाबूलाल सोरेन ने दिशोम  गुरु की तस्वीर पर माल्यार्पण किया और श्रद्धांजलि अर्पित की.  

28 ज़िलों को मिलाकर बृहत झारखंड के लिए अब होगा आंदोलन 

उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का सपना था कि बिहार, झारखंड और बंगाल के कुल 28 जिलों को मिलाकर एक वृहद झारखंड राज्य बनाया जाए. लेकिन आज तक केवल 18 जिलों को ही शामिल किया गया है. उन्होंने शिबू सोरेन के इस अधूरे सपने को पूरा करने के लिए "शिबू सोरेन सेना " का गठन किया है. यह सेना आने वाले दिनों में बृहद झारखंड आंदोलन की अगुवाई करेगी. बाबूलाल सोरेन ने दावा किया कि झारखंड से अलग रह गए 10 जिलों को झारखंड में जोड़ने के लिए बिहार, बंगाल और झारखंड में व्यापक जन जागरण अभियान चलाया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि यही दिशोम गुरु को सच्ची श्रद्धांजलि होगी. बता दें कि बाबूलाल सोरेन के पिता झारखंड के कद्दावर  नेता है. दिशोम गुरु के साथ उन्होंने झारखंड अलग राज्य के लिए आंदोलन में हिस्सा लिया. 

चंपई सोरेन शिबू सोरेन परिवार के सबसे विश्वासपात्र माने जाते थे
 
वह शिबू सोरेन परिवार के सबसे विश्वासपात्र माने जाते थे. 2024 में जब हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा तो उन्होंने अपनी कुर्सी चंपई सोरेन को दी. लेकिन जब वह जेल से बाहर आए तो फिर हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बन गए. इसके बाद तो चंपई सोरेन नाराज हो गए और यहां तक की पार्टी बदल दी और अपने पुत्र बाबूलाल सोरेन के साथ भाजपा में शामिल हो गए.  2024 के विधानसभा चुनाव में चंपई सोरेन बहुत प्रभाव नहीं डाल पाए. खुद की सीट तो उन्होंने बचा ली लेकिन उनके पुत्र बाबूलाल सोरेन चुनाव हार गए. अब फिर एक तरह से नए आंदोलन की शुरुआत उन्होंने शुरू की है. देखना है, इसका परिणाम क्या होता है. बाबूलाल सोरेन के आंदोलन में क्या उनके पिता का भी सहयोग मिलेगा? क्या झारखंड में भाजपा की पूरी टीम उनके साथ होगी? यह सब कई सवाल हैं, जिनका जवाब आने वाले समय में ही मिल पाएगा. 

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 

Tags:DhanbadJharkhandSibu soren SenaGhoshanaAbhiyan

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