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आजादी के 75 साल बाद भी झारखंड के इस गांव में नहीं पहुंचा विकास, न मिला पानी और ना ही सड़क

BY -
Ranjana Kumari
Ranjana Kumari
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 4:39:31 PM

चाईबासा(CHAIBASA): सारंडा स्थित छोटानागरा पंचायत के बहदा गांव के ग्रामीणों की समस्या न सिर्फ बड़ी है, बल्कि सरकार और प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोलती नजर आ रही है. आपको बता दें कि बहदा गांव जाने के लिये आजादी के बाद से लेकर आज तक पक्की सड़क और ओम्बाबाई नाला पर पुल का निर्माण नहीं हो सका हैं. इस वजह से बहदा गांव के ग्रामीण बरसात के मौसम में लगभग 3 माह तक अपने आपको गांव में ही कैद रखने या टापू की तरह जीवन बिताने को मजबूर रहते हैं. 

बरसात में कोई पड़े न बीमार, प्रार्थना करते हैं लोग

दरअसल, छोटानागरा-किरीबुरु पीडब्ल्यूडी मुख्य सड़क से बहदा गांव की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है, इसके बीच में तितलीघाट गांव भी आता है. इस गांव में कोई अगर बरसात के मौसम में बीमार या प्रसव पीड़ा से परेशान हो जाये तो ग्रामीण उसे चाहकर भी अस्पताल नहीं पहुंचा सकते हैं. वजह यह है कि पीडब्ल्यूडी सड़क से बहदा गांव तक की कच्ची सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है. गांव वाले रास्ते में पड़ने वाला ओम्बाबाई नाला में वर्षा होने पर पानी भर जाता है, जिससे नाला पार होना मुश्किल हो जाता है. आसपास के पहाड़ों से उतरने वाला वर्षा का पानी इस नाले से उफान मारते हुए बहता है. 

गांव के मुंडा रोया सिद्धू और कामेश्वर मांझी ने बताया कि छोटानागरा पंचायत के तमाम गांवों में मलेरिया व मौसमी बीमारी का प्रकोप बढ़ा है, इससे हमारा गांव भी बुरी तरह से प्रभावित है. टाटा स्टील की टीएसएलपीएल खादान प्रबंधन हमारे गांव में चिकित्सा शिविर लगाने पर सहमत हो गई है लेकिन सड़क व पुल नहीं होने की वजह से उनके चिकित्सक टीम व एम्बुलेंस गांव नहीं जा सकती, गांव से बाहर हम मरीजों को भी ला नहीं सकते. ऐसी स्थिति में हम क्या करें, मरीजों को सड़क, पुल के आभाव में ऐसे हीं मरते छोड़ दें! ग्रामीण बरसात में राशन व दूसरी जरूरी सामान भी खरीदने या लाने छोटानागरा आदि गांवों में नहीं जा सकते है.

पानी की भी होती है किल्लत
बहदा गांव तक बाईहातु स्थित आसन्न ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत पानी पाईपलाइन बिछायी तो गयी है लेकिन पानी गांव तक नहीं पहुंच पाता है. कुछ घरों तक जाता भी है तो मुश्किल से 1-2 बाल्टी पानी भर पाते हैं. पंचायत फंड से गांव में सोलर चालित एक जलमीनार बोन्डोल चाम्पिया के घर के सामने लगाया गया था जो एक माह से खराब है, इसे ठीक करने हेतु जब विभागीय पदाधिकारी को कहा जाता है तो जवाब मिलता है कि जब टेंडर होगा तब ठीक किया जायेगा. ग्रामीण स्वयं पैसा से प्राईवेट मिस्त्री बुलाकर इसे ठीक कराने का प्रयास किए लेकिन ठीक नहीं हुआ. ग्रामीण नदी-नाला का पानी पीने को मजबूर हैं. गांव में स्थित विद्यालय में पढ़ाने मनोहरपुर के शिक्षक आते हैं, लेकिन दलदल में तब्दील सड़क और नाले के ऊपर से बहती पानी की वजह से वह भी बैरंग लौट जाते हैं बच्चों की शिक्षा पूरी तरह से प्रभावित हो गई है. 

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मधु कोड़ा और सांसद गीता कोड़ा ने कहा अभी तक सड़क नहीं बनना दुर्भाग्यपूर्ण 
सरकार के मुख्यमंत्री से लेकर मुखिया तक के तमाम जनप्रतिनिधि व पुलिस-प्रशासन के अधिकारी का दरवाजा खटखटा चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने जोजोगुटू गांव की स्थिति देखकर कहा कि वास्तव में बहदा गांव के लोगों की समस्या सबसे बड़ी समस्या है. बहदा गांव की सड़क और नाले पर पुल का निर्माण हेतु हमने चार बात तत्कालीन और वर्तमान उपायुक्त से मिलकर कहा है. सांसद गीता कोड़ा ने भी विभागीय मंत्री व उपायुक्त से कहा है, लेकिन आज तक सड़क नहीं बनना दुर्भाग्य व शर्म की बात है. जल्द ही इसके खिलाफ बड़ा कदम उठाया जायेगा.

रिपोर्ट: संदीप गुप्ता, गुवा/चाईबासा

Tags:News

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