धनबाद(DHANBAD) | धनबाद में रविवार की आधी रात के बाद से हलचल है. आखिर हलचल हो भी क्यों नहीं, धनबाद के "मजबूत घरानों" में चर्चित सिंह मेंशन की तरफ आज तक किसी ने नजर उठाने की हिम्मत नहीं की थी, फिर आखिर किसने बम फेंका? किसने बम से हमला बोला? उनका मकसद क्या हो सकता है? क्या सुतली बम फेंकने से सिंह मेंशन डर जाएगा? क्या धनबाद में वर्चस्व को लेकर एक बार फिर संघर्ष की आशंका बन गई है? क्या बमबारी की वजह निगम चुनाव हो सकता है? ऐसे कई सवाल हैं, जो झारखंड की हवा में तैर रहे है. यह अलग बात है कि पुलिस इसके खुलासे में लग गई है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच में तेजी लाई गई है.
धनबाद पुलिस के लिए भी यह घटना बड़ी चुनौती है
धनबाद पुलिस के लिए भी यह घटना बड़ी चुनौती है. दरअसल, रविवार की आधी रात के बाद अपराधियों ने सिंह मेंशन में बमबाजी की घटना की है. दो बम फेंके गए, जिसमें एक बम परिसर के भीतर फेंका गया, जबकि दूसरा बम सड़क की ओर फेंका गया. कहा जा रहा है कि परिसर के भीतर उसे जगह पर बम फेंका गया, जहां बैठकी होती है. इस घटना के बाद अफरा तफरी मच गई, पुलिस प्रशासन भी त्वरित एक्शन में आया. सिटी एसपी सहित अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह से घटना की जानकारी ली. सीसीटीवी फुटेज खंगाला गया, फिर सीसीटीवी का डीवीआर पुलिस अपने साथ ले गई. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. बता दें कि सिंह मेंशन में फिलहाल विधायक रागिनी सिंह, पूर्व विधायक संजीव सिंह और उनकी माता कुंती सिंह रहती हैं.
सवाल -क्या अपराधियों की कोई बड़ी साजिश थी ?
जिस तरह से घटना को अंजाम दिया गया है, उससे ऐसा लगता है कि अपराधियों की कोई बड़ी साजिश थी. सिंह मेंशन में सुरक्षा के भी सख्त इंतजाम रहते हैं, इसके बाद भी आधी रात के बाद बम फेंकने का मकसद क्या हो सकता है? पुलिस अब इसका जवाब ढूंढेंगी, पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है. पुलिस को गेट के अंदर और बाहर बम के अवशेष मिले हैं, जिससे पुष्टि हुई है कि यह सुतली बम थे . सूत्र बताते हैं कि सीसीटीवी फुटेज में बाइक पर सवार दो संदिग्ध दिखाई दे रहे हैं, हालांकि अभी तक उनकी पहचान नहीं हो पाई है. अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बम किसने और किस मकसद से फेंका ?खैर ,जो भी हो यह घटना चौंकाने वाली है. जानकारी के अनुसार धनबाद के एक तरह से "किंग" माने जाने वाले सूर्यदेव सिंह ने सिंह मेंशन का निर्माण 1980 के दशक में कराया था. उसे समय पूरा परिवार सिंह मेंशन में ही रहता था. धीरे-धीरे परिवार बंटा और फिलहाल अलग-अलग रहते हैं.
1980 के बाद से सिंह मेंशन कोयलांचल की राजनीति का केंद्र बना हुआ है
1980 के बाद से सिंह मेंशन कोयलांचल की राजनीति का केंद्र बना हुआ है. 1977 में सूर्यदेव सिंह पहली बार झरिया से विधायक बने. उसके बाद झरिया से उठकर धनबाद के सिंह मेंशन की हवेली एक तरह से राजनीति के केंद्र में आ गई. कहा जा सकता है कि 1977 के बाद ही सूर्यदेव सिंह और उनका परिवार कोयलांचल की राजनीति के केंद्र में आ गया. 1977 में वह पहली बार झरिया विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे. 1991 में अपनी मृत्यु तक वह झरिया से विधायक रहे. उनके समय में सिंह मेंशन सत्ता का दूसरा नाम था. सूर्यदेव सिंह का प्रभाव इतना था कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को भी सिंह मेंशन बुला लिया था. पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ उनके संबंध जग जाहिर थे. यह अलग बात है कि दोनों उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के ही रहने वाले थे.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
