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झारखंड में इस जगह के लोगों को मरने के बाद नसीब नहीं 2 गज जमीन! जानें पूरा मामला

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 4:23:06 AM

चाईबासा (CHAIBASA): मनुष्य का जन्म लेना जितना सत्य है उतनी ही सत्य मौत है. अलग-अलग धर्मों के लोग अपनी धार्मिक आधार पर मृत लोगों का अंतिम संस्कार करते है. ऐसा माना जाता है कि अगर अंतिम संस्कार अच्छे से हो गया तो आत्मा को शांति मिल जाती है, मगर किरीबुरू के झारखंड-ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर लोगों को सरकार और जनप्रतिनिधियों पर शर्म आने लगेगी. इस क्षेत्र में अंतिम संस्कार के लिए एक भी शवदाह गृह नहीं बनवाया गया है, जिसके कारण बरसात के दिनों में लोगों को अंतिम संस्कार करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

नदी में बह जाते हैं शव!

अंतिम संस्कार के लिए यहां के लोग झारखंड सीमा के किरीबुरु शहर से सटे ओडिशा के पचरी गांव के समीप स्थित कारो नदी तट किनारे स्थित श्मशान घाट पर जाते हैं. इस घाट का आलम ऐसा की बारिश के दिनों में शवों को जलाना काफी मुश्किल हो जाता है. कई शव अधजले ही भारी बारिश में बह जाते है.

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शव को श्मशान में जलाने से रोक

जुलाई 2020 में ओडिशा के लोगों ने झारखंड से आने वाले शवों को कारो श्मशान घाट पर जलाने से रोक लगा दिया था क्योकि एक अधजला शव पास के गांव के नदी किनारे में पत्थर व झाड़ियों के बीच फंस गया था और जहां शव फंसा था वहां ग्रामीण स्नान करने व पेयजल आदि के रूप में इस्तेमाल के लिए पानी ले जाते थे. बाद में पुलिस और जनप्रतिनिधियों के मनाने के बाद इसे फिर से झारखंड के लोगों के लिए शुरू कर दिया गया.  

इस वजह से अभी तक नहीं बना श्मशान घाट

श्मशान घाट के लिए ठेकेदार वेलफेयर एसोसिएशन किरीबुरु-मेघाहातुबुरु के ठेकेदारों ने सकारात्मक प्रयास करते हुए आपस में सहयोग राशि देकर लाखों रुपये फंड जमा कर लिये थे, लेकिन ओडिशा वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण ठेकेदार एसोसिएशन शवदाह गृह अथवा शेड बनाने का कार्य प्रारंभ नहीं कर पाए. वहीं, झारखंड मजदूर संघर्ष संघ किरीबुरु के महामंत्री राजेन्द्र सिंधीया ने कुछ सेलकर्मियों के साथ क्योंझर जिला प्रशासन व डीएफओ को शवदाह गृह बनवाने और एनओसी प्रदान करने के लिये पत्र भी पूर्व में दिया था, लेकिन दोनों अधिकारी का तबादला होने की वजह से मामला अधर में लटका हुआ है.

रिपोर्ट:  संदीप गुप्ता, गुवा(चाईबासा)

Tags:News

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