✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

पशुपालकों की लापरवाही कृषकों पर भारी, पशु खुला छोड़ने पर हो रही फसल की बर्बादी

BY -
Purnima
Purnima
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 6:42:32 PM

दुमका (DUMKA) : भारत एक कृषि प्रधान देश है. कृषि और पशुपालन का अन्योन्याश्रय संबंध रहा है. एक समय था जब पशु विनमय का साधन था. पशु के बगैर कृषि की कल्पना नहीं की जा सकती थी. समय बदला कृषि के तकनीक बदले. वर्तमान समय में कृषि कार्य में जब आधुनिकतम तकनीक का उपयोग होने लगा तो पशु की महत्ता कम हुई. अब वही पशु कृषकों के लिए समय समय पर सिरदर्द साबित होने लगा.

पशुपालकों की लापरवाही

इसकी एक बानगी देखने को मिली दुमका जिला के जामा प्रखंड के सिमरा पंचायत में. पशुपालकों की लापरवाही का खामियाजा कृषकों को भुगतनी पड़ रही है. पशु को खुला छोड़ने पर फसल की बर्बादी होते देख ग्रामीणों ने बैठक की. बैठक में कुंडाडीह, बाबूकदेली एवं मचाडीह के ग्रामीणों ने बैठक कर निर्णय लिया कि पशु से हुए फसल के नुकसान की भरपाई पशु मालिकों को करनी होगी. इसके लिए पशु के अनुरूप दंड निर्धारित किया गया. 
 
आर्थिक दंड का बनाया नियम 

तय किया गया कि भैंसा या भैंस द्वारा फसल को नुकसान पहुचाया जाता है तो ₹200, गाय या बैल द्वारा नुकसान पहुचाने पर ₹150, बकरा या बकरी द्वारा नुकसान पहुचाने पर ₹100, जबकि छोटा बकरा या बकरी द्वारा नुकसान पहुचाने पर ₹50 का जुर्माना भरना पड़ेगा. जुर्माना की राशि ग्राम प्रधान के पास जमा करना होगा. किसानों ने मवेशियों से फसल की सुरक्षा और फसल चराने की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए आपसी सहमति से आर्थिक दंड का नियम बनाया है.
 
सौहार्द बिगड़ने की संभावना

ग्रामीणों का कहना है कि सूखाग्रस्त होने के बाबजूद किसानों ने मशीन से सिंचाई कर फसल लगाया है. लेकिन कुछ लोग अपने मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं. जिससे फसल बर्बाद होने से बड़ी समस्या उत्पन्न हो रही है. किसान और पशुपालकों के बीच हमेशा तकरार की स्थिति बनी रहती है. आपसी सौहार्द बिगड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसलिए आपसी सहमति से यह नियम बनाया गया है. 

काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद

ग्राम प्रधान नेपाल दर्बे एवं भरीलाल दर्बे की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में अमीर लाल दर्वे, इन्द्रकांत दर्वे, प्रदीप दर्वे, प्रमोद यादव, तपेश्वर दर्वे, कुलदीप दर्वे, जयकांत दर्वे, अंजनी दर्वे, अरुण प्रसाद दर्वे, लाल किशोर दर्वे, अर्जुन दर्वे, रोहित दर्वे, मुन्ना मरीक, बैद्यनाथ दर्वे, पोबिल राउत सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे. 

कृषक और पशुपालकों के बीच तकरार

यह सत्य है कि कृषि कार्य मे आधुनिकतम तकनीक का उपयोग होने के कारण कृषि कार्य में पशु का उपयोग कम होने लगा. लेकिन इसका मतलब यह कदापि नहीं कि पशु की महत्ता समाप्त हो गयी है. कृषि से अलग भी पशु का महत्व है. इसलिए लोग आज भी पशुपालन कार्य मे लगे है. लेकिन जब पशु के कारण कृषक और पशुपालकों के बीच तकरार की स्थिति उत्पन्न हो तो ऐसी स्थिति में आपसी सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से ग्रामीणों का यह निर्णय सराहनीय है. जरूरत है इस निर्णय पर कड़ाई से अमल करने की.

रिपोर्ट: पंचम झा 

Tags:dumkanewsdumkaupdatejharkhandnewsjharkhandthenewspostfarmerscattle herders

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.