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सबसे आगे नाम रहने के बावजूद चूक गए मुख़्तार अब्बास, अब क्या होगा नक़वी साहब!

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 7:46:26 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एनडीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी. एनडीए ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़  को अपना उम्मीदवार बनाया है. हालांकि भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी का नाम एनडीए  के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार में सबसे आगे चल रहा था लेकिन एनडीए ने जगदीप धनखड़ को अपना उम्मीदवार बनाया है. नकवी को जब राज्यसभा का टिकट नहीं दिया गया तब से ही राजनीतिक गलियारों में उनके नाम पर चर्चा तेज हो गई थी. सबका मानना था कि बीजेपी नकवी के जरिए अल्पसंख्यक समुदाय को अपनी ओर लाने का प्रयास करेगी मगर बीजेपी ने ऐसा नहीं किया. अब सवाल ये खड़े हो रहे हैं कि नकवी का राजनीतिक भविष्य क्या होगा? क्या पार्टी उनको संगठन में कोई बड़ी जिम्मेवारी देगी? आएं समझते हैं इस स्टोरी में आगे क्या हैं उनके पास रास्ते?

संगठन में मिल सकता है बड़ा पद
केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा के बाद ऐसा माना जा रहा था कि नकवी को भाजपा उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बना सकती है लेकिन ऐसा हुआ नहीं, जिसके बाद अब चर्चाएं तेज हो गईं हैं कि भाजपा संगठन में ही नकवी को कोई बड़ी जिम्मेवारी दे सकती है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि बीजेपी ने पहले भी ऐसा किया है. कई बड़े केंद्रीय मंत्रियों को पहले भी भाजपा संगठन में बड़ा स्थान दे चुकी है. 

राज्यपाल का पद दिया जा सकता है
उपराष्ट्रपति उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद अब ये भी चर्चाएं तेज हो गई हैं कि उन्हें किसी बड़े राज्य का राज्यपाल बनाया जा सकता है. आपको बता दें कि देश में फिलहाल एक ही मुस्लिम समुदाय से राज्यपाल है. केरल के आरिफ मोहम्मद खान ही इकलौते अल्पसंख्यक समुदाय से राज्यपाल हैं. ऐसे में कहा ये भी जा रहा है कि नकवी को किसी बड़े राज्य का राज्यपाल भी बनाया जा सकता है.

ये भी देखें:

बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ होंगे NDA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार, जेपी नड्डा ने की घोषणा

क्या खत्म हो जाएगा राजनीतिक करियर !
राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं ये भी हैं कि बीजेपी उन्हें साइडलाइन करना चाहती है और किसी अन्य मुस्लिम समुदाय के चेहरें को आगे लाना चाहती है. मगर कई राजनीतिक सलाहकारों का मानना है कि नकवी की मुस्लिम समुदाय में बहुत बड़ा कद है. फिलहाल बीजेपी में उनके कद का कोई भी मुस्लिम नेता नहीं है. ऐसे में बीजेपी नकवी को साइडलाइन करने का जोख्मि नहीं लेना चाहेगी. आपको बता दें कि 2024 में लोकसभा का चुनाव होना है और ऐसे में बीजेपी को मुस्लिम वोटों का गणित भी बिल्कुल समझ आता है. 

नकवी का राजनीतिक सफर 
नकवी की राजनितक करियर 1975 आपातकाल के दौरान हुई थी. इस समय उन्हें विरोध के कारण जेल भी जाना पड़ा था. नकवी ने 1980 में जनता पार्टी (सेक्युलर) के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए. इसके बाद अयोध्या से 1980 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव निर्दलीय लड़ा, लेकिन फिर हार गए. इसके बाद उन्होंने 1998 में रामपुर से मुख्तार अब्बास नकवी ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. जिसके बाद उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सुचना प्रसारण मंत्री बनाया गया था. इसके बाद 2014 में मोदी सरकार में उन्हें अल्पसंख्यक राज्यमंत्री बनाया गया फिर 2016 में कैबिनेट का दर्जा मिल गया. 2019 में फिर से जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभाली तो मुख्तार अब्बास नकवी को फिर से केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री बनाया गया.

कॉपी: विशाल कुमार, रांची        

Tags:News

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