धनबाद(DHANBAD): धनबाद में अभी निगम चुनाव की जबरदस्त चर्चा और सक्रियता है. आखिर हो क्यों भी नहीं, धनबाद के प्रथम नागरिक होने की लड़ाई है और इस लड़ाई में जो जीतेगा वह 5 साल तक मेयर के "म्यूजिकल चेयर" पर विराजमान रहेगा। वैसे तो 2010 से लेकर कई लोगों ने मेयर बनने की कोशिश की, लेकिन श्रीमती इंदु देवी और चंद्रशेखर अग्रवाल का ही प्रयास सफल रहा. यह अलग बात है कि 2026 के चुनाव में भी दोनों मैदान में हैं. इसके अलावा भी अन्य लोग हैं और लड़ाई तगड़ी है. यह लड़ाई पार्टियों की भी परीक्षा ले रही है, तो उम्मीदवारों की भी कद -काठी और ताकत को नाप रही है. वैसे, तो धनबाद नगर निगम का गठन 2006 को हुआ था.
धनबाद निगम का पहला चुनाव 2010 में हुआ था
लेकिन पहला चुनाव 2010 में हुआ और 2010 में मेयर सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित थी. धनबाद के लगभग सभी बड़ी हस्तियां और उनके लोग मेयर पद के चुनाव में थे. पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रोफेसर रीता वर्मा भी उम्मीदवार थी. इंदु देवी भी उम्मीदवार थी. पूर्व सांसद शंकर दयाल सिंह की पुत्र वधू डॉक्टर किरण सिंह, विजय झा की पत्नी डॉक्टर शिवानी झा,वीपी सिन्हा की पुत्र बधू डॉक्टर उर्मिला सिन्हा , शकुंतला मिश्रा सहित अन्य उम्मीदवार थे. धनबाद नगर निगम के पहले चुनाव में भी जबरदस्त लड़ाई हुई थी. उसे समय भी भाजपा के दो ध्रुव हुए थे. कुंती सिंह, इंदु देवी के पक्ष में काम कर रही थी ,जबकि राज सिन्हा प्रोफेसर रीता वर्मा के लिए काम कर रहे थे. इस समय भी कार्यकर्ता विभाजित थे. 2026 के चुनाव में भी कार्यकर्ता विभाजित हैं.
2015 का चुनाव भी कम रोचक नहीं था
इसके बाद 2015 में चुनाव हुआ. यह चुनाव भी कम रोचक और दिलचस्प नहीं था. चुनाव के बीच एक ऐसा क्षण आया जब भाजपा से समर्थन प्राप्त प्रत्याशी प्रदीप संथालिया मैदान से हटने की घोषणा कर दी. फिर भी लड़ाई दिलचस्प की ओर बढ़ी और शेखर अग्रवाल चुनाव जीत गए. इस चुनाव में शमशेर आलम दूसरे नंबर पर रहे. यह चुनाव पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था. चुनाव धीरे-धीरे परवान पर चढ़ता चला गया. उसके बाद प्रदीप संथालिया ने नाम वापस ले लिया। उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी. उसके बाद यह माना जाने लगा कि भाजपा चंद्रशेखर अग्रवाल को समर्थन करेगी ,लेकिन ऐसा उस समय भी नहीं हुआ और भाजपा ने राजकुमार अग्रवाल को समर्थन दे दिया। 2026 के चुनाव में भी "समर्थन" का खेल खूब हुआ है. अब आगे क्या होता है ,इसपर सबकी नजरें टिकी हुई है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
