धनबाद(DHANBAD):धनबाद में मेयर प्रत्याशी मैदान में उतर गए हैं. सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया गया है. चुनावी तपिश बढ़ने लगी है. लगभग सभी उम्मीदवार धनबाद को "स्वर्ग" बनाने का दावा कर रहे हैं. धनबाद नगर निगम के लिए 2026 में तीसरी बार चुनाव होने जा रहा है. इस चुनाव में कई ताकतवर उम्मीदवार टकरा रहे हैं. चुनाव रोचक होता जा रहा है. कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार भी मैदान में हैं. तो झामुमो समर्थित भी हैं, तो भाजपा समर्थित उम्मीदवार भी ताल ठोक रहे हैं. भाजपा के कई बागी भी मैदान में हैं. ऐसे में पार्टियों की साख तो फंसी है ही , उम्मीदवारों का भी राजनीतिक भविष्य दांव पर है. कुछ तो ऐसे हैं, जो अगर चुनाव नहीं जीत पाए तो उनका राजनीतिक भविष्य ही समाप्त हो जाएगा.
कई उम्मीदवारो का राजनीतिक भविष्य कैसे है दांव पर
धनबाद मेयर पद के लिए फिलहाल कुल 29 उम्मीदवार मैदान में हैं. 23 फरवरी को वोटिंग होगी और 27 फरवरी को मतगणना होगी। इस बीच सभी उम्मीदवार निवर्तमान पार्षदो का समर्थन लेने की कोशिश में जुटे हुए हैं. उनके सामने सरेंडर की मुद्रा में हैं. दरअसल, धनबाद नगर निगम क्षेत्र में कुल 55 वार्ड आते हैं. कुछ ऐसे पार्षद हैं, जो लगातार कई बार से चुनाव जीत रहे हैं. उनकी पूछ अधिक हो गई है. मेयर के उम्मीदवार उनके पास जा रहे हैं और सहयोग की अपील कर रहे हैं. कह रहे हैं कि अभी आप हमारा ध्यान रखिए, चुनाव जीतने के बाद हम आपका ध्यान रखेंगे। दरअसल, पार्षद वार्ड के वोटरों से सीधा संपर्क होते हैं. वह अपने वार्ड के वोटरों को नाम और चेहरे से भी जानते हैं. ऐसे में कम से कम मेयर के चुनाव में उनकी बड़ी भूमिका होती है.
पार्षद के मजबूत उम्मीदवारों के घर हो रहा अधिक दस्तक
वैसे, तो लगभग अपने वार्डों में भी पार्षद के उम्मीदवार टकरा रहे हैं. लेकिन जिनके जीतने की संभावना अधिक है, उनके दरवाजों पर मेयर उम्मीदवारों का दस्तक अधिक हो रहा है. वैसे भी धनबाद मेयर का चुनाव कई दल और कई लोगों के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ गया है. तमाम कोशिशें के बावजूद झरिया के पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह मैदान में डटे हुए हैं, तो पूर्व मेयर शेखर अग्रवाल भी झामुमो के समर्थन से इस बार मैदान में खड़े है. भाजपा का समर्थन संजीव अग्रवाल के साथ है तो भाजपा के कुछ बागी लोग भी मैदान में है. कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार समशेर आलम भी किस्मत आजमा रहे हैं. कांग्रेस और झामुमो का तो कोई बागी उम्मीदवार नहीं हैं. कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को मना लिया है. झामुमो भी बागी से नाम वापस कराने में सफल रहा. लेकिन भाजपा इसमें फेल कर गई और पार्टी पर बागी उम्मीदवार भारी पड़ते दिख रहे हैं. देखना दिलचस्प होगा कि आगे आगे होता है क्या??
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
