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पुरी में 4 दशक बाद खोले गए बहुचर्चित सर्पकोष, नागमणि की जगह मिला हीरे जवाहरात का जखीरा, हैरानी में पंडा समाज

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
Published: July 15, 2024,
Updated: 11:40 PM

टीएनपी डेस्क : भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर अपनी मान्यताओं को लेकर काफी प्रसिद्ध है. 12वीं सदी के इस मंदिर की कई कहानियां भी लोगों के बीच काफी प्रचलित है. इन्हीं में से एक कहानी यह भी है कि इस मंदिर के तहखाने में रखे खजाने की रक्षा खुद नाग देवता करते हैं. यह कहानी 12वीं सदी से ही चली आ रही है. कई लोगों को इस बात पर काफी यकीन है तो कई ऐसे हैं जो इस बात को मानने से इंकार करते हैं. ऐसे में इस बात में कितनी सच्चाई है इस बात का पता तो भंडार गृह में जाकर ही पता चलेगा.

वहीं, जगन्नाथ मंदिर के खजाने को रविवार 14 जुलाई को खोला गया. इसके लिए ओडिशा सरकार कि ओर से एक टीम गठित की गई थी. टीम में सरकारी प्रतिनिधि के साथ साथ ASI के अधिकारी व गजपति महाराज के प्रतिनिधि और 4 सेवादारों समेत 11 लोग मौजूद रहे. ऐसे में कई लोगों को जानने की उत्सुकता हुई कि क्या वाकई में मंदिर के भंडार गृह में सांप है या नहीं. 

भंडार गृह में कोई सांप नहीं

वहीं, भंडार गृह खुलने से इस कहानी का सच भी सामने आ गया की इन खजानों की सुरक्षा के लिए अक्सर भंडार गृह में सांप मौजूद रहते हैं. इस कारण कल भंडार गृह को खोलते वक्त सांप पकड़ने वाली टीम को भी बुलाया गया था. लेकिन हुआ कुछ और ही. जब कल समिति के सदस्य भंडार गृह से वापस आए तो उन्होंने बताया कि ऐसा कुछ नहीं है. भंडार गृह में कोई सांप नहीं है ये सिर्फ अफवाह है.

कड़ी सुरक्षा में स्थानांतरित कर सील कर किया गया सामान

बता दें कि, 46 साल बाद खुले मंदिर के इस भंडार गृह को कीमती सामानों व गहनों के वजन की डिजिटल सूची बनाने के लिए खोला गया. साथ ही भंडार गृह कि मरम्मत भी करवाई जाएगी. वहीं, सामानों को रखने के लिए विशेष तरह के बक्से मंगवाए गए थे. कड़ी सुरक्षा में रत्न भंडार को खोल कर बाहरी भंडार में मौजूद सामानों को लकड़ी के छह बक्सों में स्थानांतरित कर सील कर दिया गया है. हालांकि, अंदर भंडार के सामानों को अब तक स्थानांतरित नहीं किया गया है. वहीं, बताया जा रहा है कि, लकड़ी के बक्सों में बंद कर आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं को अस्थायी सुरक्षित कमरे में रखा जाएगा. जिसकी पहचान कर ली गई है. साथ ही उस कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगाने सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गईं हैं. सीसीटीवी कैमरे कि निगरानी में ही सारे आभूषणों और सामानों की लिस्टिंग इ जाएगी.

46 साल पहले 1978 में मंदिर के इस खजाने को खोला गया था

46 साल पहले 1978 में मंदिर के इस खजाने को खोला गया था. उस वक्त रत्नों से भरी तिजोरियां देखने को मिली थी. 1978 के बाद साल 2018 में भी इसे दुबारा खोलने का प्रयास किया गया था, लेकिन चाबियां नहीं मिलने के कारण फिर वह कोशिश बंद कर दी गई. बता दें कि, इस भंडार गृह में भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के कपड़े, गहने और सोने चांदी के बर्तन रखे हुए हैं. साथ ही 12 वीं सदी से राजाओं महाराजों द्वारा चढ़ावे का समान, राजाओं के मुकुट और कई सारे कीमती रत्न रखे हुए हैं. वहीं, साल 2018 में पूर्व कानून मंत्री प्रताप जेना ने विधनसभा में बताया था कि, आंकड़ों के मुताबिक साल 1978 में भंडार गृह में कीमती पत्थरों से जड़ित सोने के गहने (करीब साढ़े 12 हजार भरी) थे. साथ ही चांदी के बर्तन जो कि करीब 22 हजार भरी के थे.

चाबी न मिलने के कारण नहीं खुला था भंडार गृह

वहीं, 4 अप्रैल 2018 में हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार द्वारा भंडार गृह को खोलने की कोशिश की गई थी. लेकिन चाबी न मिलने के कारण सरकार द्वारा गठित 16 लोगों की टीम को भंडार गृह तक पहुंच कर भी खाली हाथ लौटना पड़ा. जिसके बाद चाबी खोने के कारण काफी हंगामा भी हुआ. सरकार द्वारा इस पर न्यायिक जांच के आदेश भी दिए गए. लेकिन इससे जुड़ी रिपोर्ट जांच टीम द्वारा देने पर भी सरकार द्वारा इसे सार्वजनिक नहीं किया गया.

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