टीएनपी डेस्क(TNP DESK):4 मार्च 2007 यह वही काला दिन था जब जमशेदपुर के सबसे लोकप्रिय सांसद सुनील महतो की हत्या उस समय कर दी गई जब वह एक फुटबॉल टूर्नामेंट में मौजुद थे.अचानक से उनके ऊपर दनादन गोलियाँ चलीं गई, जिससे उनकी मौत हो गई.वही उनके दो बॉडीगार्ड्स की भी हत्या कर दी थी. आज उनके मर्डर के लगभग 20 साल पूरे हो चुके है लेकिन आज भी सुनील महतो मर्डर केस एक अनबुझी पहेली बनकर रह गया है.आखिर सुनील महतो हत्याकांड के पीछे किसका हाथ था, किसने उनको मरवाया अब तक पूरी तरह से खुलासा नहीं हो पाया है.
4 मार्च 2007 को हुई थी हत्या
आपको बताएं कि सुनील महतो झारखंड के आदिवासी मूलवासी के एक ऐसे आंदोलनकारी नेता माने जाते थे जो घर-घर में बसते थे. लोगों में उनकी काफी ज्यादा लोकप्रियता थी यही वजह है कि सुनील महतो ने संसद का चुनाव भी जीता लेकिन 41 साल की उमर में 4 मार्च 2007 को नक्सलियों ने उनको पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी और उनका मर्डर कर दिया.जिस समय उनके ऊपर गोलियां बरसाए गए उस समय वह घाटशिला अनुमंडल में एक फुटबॉल प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए गए हुए थे. जहां वह मुख्य अतिथि के रूप में अमंत्रित किए गए थे ,लेकिन उनको क्या पता था कि मौत उनका इंतजार कर रही है.
हत्या के 20 साल पुरे होने के बावजूद नहीं हो पाया खुलासा
आज सुनील महतो हत्याकांड के 20 साल पुरे हो चुके है लेकिन यह हत्याकांड आज भी सुलझ नहीं पाया है और एक अनबुझी पहेली बन कर रह गया है.खुलेआम इतने लोगों के बीच एक एमपी पर गोली चलाना और हाई प्रोफाइल के केस होने के बावजुद इसका ना सुलझाना एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है.आपको बता दे कि सुनील महतो हत्याकांड में मुख्य आरोपी नक्सली राहुल को पुलिस सीआईडी सीबीआई और एनआई रिमांड पर लेकर पूछ्ताछ तक नहीं कर पाई.इस मामले में सीबीआई और जमशेदपुर पुलिस ने जांच की है लेकिन फिर भी आज तक सुनील महतो और उनके दो अंगरक्षकों को इन्साफ नहीं मिल पाया.
मुख्य आरोपी से चार एजेंसियां नहीं कर पाई थी पूछताछ
आपको बता दें कि सुनील महतो हत्याकांड के मुख्य आरोपी रहे नक्सली राहुल को बंगाल सरकार ने पूर्णवास नीति के तहत नौकरी भी दे दी लेकिन सुनील महतो हत्याकांड के पीछे क्या वजह थी, क्यों उन्हें मारा गया, यह पहली आज तक सुलझ नहीं पाई.
सुनील महातो हत्याकांड से दहल गया था झारखंड
20 साल पहले हुए सुनील हत्याकांड ने झारखंड को झकझोर कर रख दिया था किसी निर्वाचित संसद की इस तरीके से खुलेआम हत्या एक तरफ जहां झारखंड की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा था तो वहीं पुलिस पर भी सवालिया निशान खड़ा कर चुका था. हालांकी हाई प्रोफाइल केस होने की वजह से इस पर जांच एजेंसीयो ने छापेमारी तेज की. कई लोगों की गिरफ़्तारियाँ भी हुई लेकिन फिर भी यह मामला ठप हो गया और एक पहेली बन कर रह गया जो आज तक नहीं सुलझ पाया.
परिजनों के मन में आज भी रहती है टिस
सुनील महतो के परिजनों का कहना है कि कभी भी प्रशासन या अन्य एजेंसियों ने सही तरीके से जांच नहीं की. यही वजह रही कि आज तक इस मामले का खुलासा नहीं हो पाया.आखिर कैसे एक एमपी की तब हत्या हो गई जब वह सार्वजनिक स्थान पर मौजुद था और उसके साथ दो अंगरक्षक भी थे आखिर कहां चूक हुई.आज तक इस बात का ख़ुलासा नहीं हो पाया. चार्ट शीट का अधूरा रहना और सजा की प्रक्रिया बीच में अटकना सिस्टम पर कई सवाल खड़े करता है.परिजनों का कहना है कि हर साल उनकी बरसी के दिन जब भी श्रद्धांजलि दी जाती है तो वह टिस बनकर चूभती है क्योंकि आज तक हत्यारो की गिरफ़्तारी नहीं हो पाई. परिजनों का कहना है कि भले ही कुछ लोग इस हत्याकांड को भूल चुके हो लेकिन आज भी जब भी सुनील महतो का नाम सामने आता है तो एक ऐसा जख्म हरा हो जाता है जो आज तक भर नहीं पाया.
