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कोल ब्लॉक के विरोध में खड़े रैयतों को मिला विधायक नलीन सोरेन का साथ, प्रशासन की बढ़ सकती है मुश्किले

BY -
Aditya Singh
Aditya Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 2:57:19 AM

दुमका (DUMKA): हाल के  दिनों में दुमका जिला के शिकारी पाड़ा प्रखंड में आवंटित कोल ब्लॉक का मामला चर्चा में बना हुआ है. जहां अधिकारियों के लाख प्रयास के बाबजूद भी  रैयत जमीन देने के लिए गांव वाले तैयार नहीं हो रहे है. अब तो रैयतों को स्थानीय झामुमो विधायक नलीन सोरेन का साथ मिल गया है. जिससे प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ने वाली है.

रैयतों को मिला विधायक नलीन सोरेन का साथ

बता दें कि रविवार को शिकारीपाड़ा प्रखंड के सरस डंगाल पंचायत भवन के सामने विधायक नलीन सोरेन और झामुमो प्रखंड कमिटी के साथ कोल ब्लॉक एरिया के ग्राम प्रधानों और जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई. बैठक के दौरान स्थानीय विधायक नलीन सोरेन ने रैयतों और ग्राम प्रधानों को विश्वास दिलाया कि हर कदम पर आपके साथ खड़े है.

जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ती है झामुमो

विधायक नलीन सोरेन ने कहा कि झामुमो शुरू से ही जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ते आ रही है. रैयतों के जमीन को कोई ले नहीं सकता. ग्रामीणों के पास जमीन ही एकमात्र जीविकोपार्जन का आधार है. अगर वे कोल ब्लॉक के लिए जमीन देना नहीं चाहते है तो जनप्रतिनिधि होने के नाते वे ग्रामीणों के साथ है. रैयतों के साथ विधायक ने भी कोल ब्लॉक के विरोध में नारे लगाए.

उत्तर प्रदेश विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित है कोल ब्लॉक

बता दें कि वर्षो पूर्व दुमका जिला के शिकारीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र में तीन कोल कंपनियों के साथ कोयला खनन के लिए एमओयू किया गया था. जिसमें  हरियाणा की एक कंपनी ग्रामीणों के विरोध के कारण शुरुआती दौर में ही क्षेत्र छोड़कर चली गई थी. जिसके बाद वर्तमान समय में जमरूपानी और शहरपुर बेस के 20 गांव में कोयला खनन के लिए उत्तर प्रदेश विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के साथ सरकार का एमओयू है. प्रक्रिया के तहत आवंटित क्षेत्र में टेस्टिंग बोरिंग कराना है.  जिला प्रशासन टेस्टिंग बोरिंग कराने के लिए सरकारी भूमि चिन्हित करते हुए ग्रामसभा से सहमति लेने का प्रयास कर रही है. लेकिन अधिकारियों को रैयतों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

संताली भाषा के जानकार अधिकारी भी नहीं समझा पाए रैयतों को

शिकारीपाड़ा में कोल ब्लॉक क्षेत्र में ड्रिलिंग का स्थानीय रैयतों के विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से समन्वय स्थापित करने के लिए एक टीम बनाई. 11 सदस्यीय टीम के सभी सदस्य संताली भाषा की जानकारी रखने वाले हैं. डीसी रविशंकर शुक्ला द्वारा 26 अप्रैल को इस संबंध आदेश जारी किया गया था. पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ड्रिलिंग कार्य के लिए संबंधित गांवों में ग्रामीणों के साथ समन्वय स्थापित कर ग्राम सभा सम्पन्न कराएं. टीम रैयतों से समन्वय स्थापित करने गांव पहुचीं लेकिन इस टीम के सदस्यों को भी रैयतों के विरोध का सामना करना पड़ा.

विधायक नलीन सोरेन द्वारा कहीं पुत्र को विरासत सौपने की तैयारी तो नही

नलीन सोरेन 7वीं बार शिकारीपाड़ा से विधायक चुनकर विधान सभा पहुचे है. हाल के कुछ वर्षों से नलीन सोरेन के पुत्र आलोक सोरेन की सक्रियता विधान सभा क्षेत्र में बढ़ गयी है. कयास लगाए जा रहे है कि आगामी विधान सभा चुनाव में आलोक सोरेन को पार्टी अपना प्रत्यासी बनाए. वैसे भी नलीन सोरेन की उम्र काफी अधिक हो चुकी है और पार्टी उनके राजनीतिक अनुभव का लाभ लेते हुए युवाओं को मौका दे. इस स्थिति में नलीन सोरेन कभी नहीं चाहेंगे कि उनका वोट बैंक बिखरे. संताल समाज के लोगों का जमीन से भावनात्मक लगाव होता है और यह जानते हुए नलीन सोरेन कभी भी उनकी भावनाओं के विपरीत कोई कदम नहीं उठाएंगे. क्योंकि उन्हें भी तो अपने पुत्र को अपना उत्तराधिकारी बनाना है.

क्या होगा प्रसासन का अगला कदम

कोल ब्लॉक एरिया में ड्रिलिंग टेस्टिंग के लिए जिला प्रशासन फूंक फूंक कर कदम रख रही है. अभी तक रैयतों द्वारा विरोध किया जाता था, अब इन रैयतों को स्थानीय विधायक नलीन सोरेन का भी साथ मिल गया है. इस स्थिति में प्रसासन का अगला कदम क्या होता है यह देखना काफी दिलचस्प होगा.

रिपोर्ट. पंचम झा 

Tags:MLA Nalin Soren'ssupport to the ryots standingagainst the coal blockthe difficulties of theadministration may increase

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