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विधायक बसंत सोरेन ने अंकिता की बहन के साथ किया छल, सरकारी नौकरी के बजाय थमा दिया ठेका कंपनी में चपरासी की नौकरी

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 9:20:44 AM

दुमका(DUMKA): 23 अगस्त को दुमका में एक ह्रदय विदारक घटना घटी. शाहरुख नामक एक सिरफिरे युवक ने सोई हुई अवस्था में अंकिता नामक लड़की के ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दिया. इस घटना में अंकिता की मौत इलाज के दौरान रिम्स में हो गई. अंकिता की मौत पर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन का दौर जारी हो गया. अंकिता की मौत के लगभग 1 सप्ताह बाद स्थानीय विधायक बसंत सोरेन उनके परिजनों से घर जाकर मिले. घटना की निंदा की और परिवार को सहयोग का भरोसा दिया. परिजनों ने उनसे एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की.

पूरा मामला

11 सितंबर को प्रशासनिक अमला के साथ विधायक बसंत सोरेन दूसरी बार अंकिता के घर पहुंचे और उसकी बड़ी बहन इशिका को एक नियुक्ति पत्र समर्पित किया. तस्वीर और खबर दुमका विधायक नामक व्हाट्सएप ग्रुप में भी प्रेषित किया गया. लोगों को इसकी जानकारी भी मिली, समाचार पत्रों की सुर्खियां भी बना. परिवार के लोग भी काफी खुश नजर आए. लेकिन आज अचानक कहानी में एक नया मोड़ उस वक्त आ गया जब अंकिता की बड़ी बहन इशिका नियुक्ति पत्र डीसी को वापस करने समाहरणालय पहुंच गयी. एनआईसी कार्यालय से निकल कर जब डीसी रविशंकर शुक्ला अपने कक्ष की तरफ जा रहे थे उसी वक्त इशिका ने आवाज लगाई. डीसी रुके, इशिका को देख और साथ चलने का इशारा कर आगे बढ़ गए. डीसी के कक्ष में प्रवेश के साथ इशिका को बुलाया गया. कक्ष में प्रवेश की अनुमति उस वक्त ना तो मीडिया कर्मियों को थी और ना ही इशिका के परिजनों को. कुछ देर बाद इशिका के पिता को भी कक्ष में बुलाया गया. बंद कमरे में क्या बातें हुई यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया? लेकिन डीसी कक्ष में जाने के पूर्व इशिका ने जो मीडिया को बयान दिया वह काफी हैरान करने वाला है. इशिका से समाहरणालय आने का कारण पूछे जाने पर उसने बताया कि यह नियुक्ति पत्र डीसी साहब को लौटाना है. नियुक्ति पत्र विधायक बसंत सोरेन के द्वारा दिया गया है लेकिन वह इस नियुक्ति पत्र से संतुष्ट नहीं है. क्योंकि बात सरकारी नौकरी की हुई थी और यह प्राइवेट जॉब का नियुक्ति पत्र दिया गया. वह भी चपरासी का.

सूत्रों की माने तो इशिका अभी खुद नाबालिक है. आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 27 अप्रैल 2005 है. उसे दोबारा नियुक्ति पत्र देने का भरोसा दिया गया है. जिसमें पद आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर का होगा लेकिन इसके लिए उसे बालिग होने तक इंतजार करना होगा.

अब सवाल उठता है कि क्या जिस वक्त विधायक बसंत सोरेन अंकिता की बड़ी बहन इशिका को नियुक्ति पत्र दे रहे थे उस वक्त क्या परिवार को नहीं बताया गया कि यह नियुक्ति पत्र सरकारी नौकरी के लिए है या अनुबंध आधारित नौकरी के लिए. क्या नियुक्ति पत्र निर्गत करने से पहले इशिका के कागजात की जांच हुई थी? उस दिन परिजन बहुत खुश थे तो आज फिर नाराजगी क्यों? क्या इस नाराजगी के पीछे कुछ राजनीति तो नहीं?

रिपोर्ट: पंचम झा,दुमका

Tags:News

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