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खनन माफियाओं ने बिगाड़ी साहिबगंज की प्राकृतिक सुंदरता! माफियाओं की करतूत से विवादों में आया जिला, खुलासे के बाद सवालों के घेरे में हेमंत सोरेन

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 10:28:04 AM

साहिबगंज(SAHIBGANJ):झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह विधानसभा क्षेत्र में आनेवाला साहिबगंज वैसे तो पूरे विश्व में प्राकृति सुंदरता के लिए जाना जाता था,लेकिन बीते कुछ सालों से माइनिंग माफियाओं की करतूत ने इस जिले को खंडर बनाकर विवादों से जोड़ दिया है.इतना ही नहीं 2024 चुनाव से पहले पत्थर माफियाओं ने जिला प्रशासन के नाक के नीचे से पहाड़ियों के हरियाली के बाद झारखंड सरकार की संरक्षित जनजातीय समुदाय के गदाई टूंगी गांव को निगल गया है,लेकिन जब न्यूज़ पोस्ट के टीम ने ग्राउंड जीरो जाकर इसका पड़ताला किया,साहिबगंज के डीसी-डीएमओ और डीएफओ से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक की पोल खुल गयी.

जिला प्रशासन और माइनिंग माफियाओं की करतूत ने जिले को विवादों में शामिल कर लिया है

साहिबगंज जिले में लगातार हो रही ईडी और सीबीआई के करवाई के बाद भी खनन माफियाओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. वैसे तो पूरे विश्व में साहिबगंज जिला प्राकृति सुंदरता के लिए जाना जाता था,लेकिन बीते कुछ सालों से जिला प्रशासन और माइनिंग माफियाओं की करतूत ने इस जिले को विवादों की सूची में शामिल कर लिया है. एक हजार  करोड़ के अवैध खनन घोटाले के खुलासे ने पहले ही इस जिले को सुर्खियों में ला दिया है, वहीं जिले में केंद्रीय एंजेसियों की जांच भी लगातार जारी है,लेकिन इस सब के बीच खनन माफियाओं के हौसले बुलंद है.उन्हें ना तो सत्ता रूढ़ शासन का डर है और ना ही जिला प्रशासन का डर है आलम यह है कि दिन हो या रात माइनिंग माफिया धड़ल्ले से प्राकृतिक के हरियालियों पर प्रहार कर पत्थरों का अवैध खनन करते है.और रात के अंदेरे में बड़े ही आराम से परिवहन भी करते हैं जबकि अवैध खनन घोटाले को लेकर ईडी की टीम आज भी साहिबगंज में लगातार कार्रवाई कर ही रही है.

हरियालियों से लबलबती पहाड़ियों को मशीन और बारूदों से वृहद क्षति पहुंचाई जा रही है

वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों के अनुसार उनके गांव के आसपास पत्थर माफियाओं की ओर से प्रशासन की मिलीभगत से उनके गांव के खूबसूरती और हरियालियों से लबलबती पहाड़ियों को बड़े-बड़े मशीन और बारूदों से वृहद क्षति पहुंचाई जा रही है.साथ गांव के आसपास हैवी ब्लास्टिंग भी किया जाता है.ब्लास्टिंग के बाद पहाड़ों के गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है लेकिन प्रदेश के सत्तारूढ़ शासन और जिला प्रशासन को नहीं सुनाई देती है.वहीं गांव के ग्रामी णों के अनुसार उनके द्वारा करीबन तीन वर्षों से लगातार आवाज उठाया जा रहा है.साथ ही ग्रामीणों की ओर से जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग भी जा रही है, लेकिन करवाई करने की जाये स्थानीय प्रशासन और खनन माफियाओं कीमिलीभगत से ग्रामीणों की आवाज को दबा दिया जाता है,इससे यह तो साफ हो गया है कि जिले में खनन माफिया मस्त और जिला प्रशासन पस्त है,और इसका खामयाजा झारखंड सरकार की संरक्षित जनजातीय समुदाय के लोगों को भुगतना पड़ रहा है.

न्यूज़ पोस्ट ने ग्राउंड जीरो पर पड़ताल की, तो लापता हुए ग्रामीणों की वोटर लिस्ट हाथ लगी

वहीं मामला सामने आने के बाद जब न्यूज़ पोस्ट की टीम ने ग्राउंड जीरो पर जाकर इसकी पड़ताल की, तो न्यूज़ पोस्ट के लापता हुए ग्रामीणों की वोटर लिस्ट हाथ लगी,सरकारी दस्तावेजों के अनुसार साहिबगंज जिले के तालझारी अंचल क्षेत्र पर स्तिथ गदाईटूंगी गांव में करीब 145 से लेकर 157 तक वोटर है,लेकिन वह कहां है या फिर इन ग्रामीणों को आसमान खा गई या जमीन निगल गया है, इसकी भनक अभी तक शासन और जिला प्रशासन को नहीं है.इधर मामले को लेकर जब न्यूज़ पोस्ट की टीम जिले के डीसी रामनिवास यादव के पास पहुंची तो डीसी सकपका गये.डीसी रामनिवास यादव ने मामले को संज्ञान में लेकर जिले के डीएमओ विभूति कुमार और सीओ सलखु हेम्ब्रम को जमकर फटकार लगाते हुए उन्हें करवाई करने का निर्देश दिया है,लेकिन 24 घंटा बीत जाने के बाद भी खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने में जिला प्रशासन नाकाम है.

पढ़ें मामले पर विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने क्या कहा

वहीं मामला सामने आने के बाद स्थानीय विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने भी ग्रामीणों की सुरक्षा और विलुप्त होते पहाड़ियों को लेकर कई बड़े-बड़े सवाल खड़ा करते हुए जिला प्रशासन को निशाने में लेकर अपने ही सरकार पर सवाल उठाया है.झामुमों विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने कहा है कि साहिबगंज जिले में बीते कुछ सालों से पत्थर माफियाओं का आतंक है.यहां शासन और जिला प्रशासन कठपुतली की तरह मुकदर्शक बनी हुई है.विधायक ने कहा कि गांव के ग्रामीणों को पत्थर माफियाओं के द्वारा गांव छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था,जिससे प्रभावित होकर ग्रामीण गांव छोकर कहां भाग गए है उन्हें कौन खोजेगा,इस मामले को लेकर आनेवाले विधानसभा सत्र में सरकार से सवाल पूछेंगे,अब देखने को बड़ा दिलचस्व होगा कि आखिर लापता हुए ग्रामीणों को चुनाव से पहले खोजने और पत्थर माफियाओं पर शिकंजा कसने में कब तक सफल होती है.

रिपोर्ट-गोविन्द ठाकुर

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