चाईबासा (CHAIBASA): सरकार किसी की हो पर योजना तो जनता की सुविधाओं के लिए बनती है, लेकिन सरकार बदलते ही योजना अधर में लटक जाती है. सरकार की वैसी दो महत्वपूर्ण योजना शायद राजनीति पचड़ में फंसने के कारण पूरी नहीं हो पा रही है या फिर कुछ और. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक था जगन्नाथपुर प्रखंड में बन रहा आयुर्वेदिक कॉलेज सह अस्पताल. चाईबासा मेडिकल कॉलेज को 334 करोड़ की लागत से इसी वर्ष पूरी हो जानी थी. जो आज तक अधूरी पड़ी हुई है. यदि यह दोनों योजना पूरी हो जाती तो इस जिले का कायापलट के साथ साथ रोजगार का बड़ा संसाधन उपलब्ध हो जाता. इसी मामले को लेकर पश्चिमी सिंहभूम जिला भाजपा के मीडिया प्रभारी हेमंत केशरी नें कार्यकारी निदेशक. झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम प्रोजेक्ट भवन,रांची को पत्राचार कर कार्य को अविलंब पूरा कराने की मांग की है.
पत्र में क्या लिखा, जानिए
भाजपा नेता हेमंत केशरी नें जहां निवेदन किया है वहीं जनशिकायत कर रहे हैं कि ,वर्ष 2019 के मार्च माह में स्वीकृत "चाईबासा मेडिकल कालेज "निर्माण की योजना, जिसे जनवरी 2022 में पूर्ण कर देना था, वह निर्माण कार्य विगत कई माह से बंद पड़ा है. आपके कार्यपालक अभियंता,चाईबासा से जानकारी मिली कि अभी तक कार्य एजेंसी "सिंप्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड"ने मात्र 8 प्रतिशत कार्य किया है,और उसे तकरीबन 15 करोड़ का भुगतान भी किया जा चुका है. यह क्यों कर हुआ यह समझ से परे है. क्योंकि स्थल में कार्य आरंभिक स्थिति में नजर आ रहा है. देखने से साफ प्रतीत हो रहा है कि कार्य एजेंसी और आपके विभाग के इंजीनियरों ने लापरवाही बररते हुए सरकारी राशी का सही उपयोग नही किया है. देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का योजना है कि देश के प्रत्येक राज्य में जनता के स्वास्थ्य सुविधा के लिये मेडिकल कालेज खोलना है,और इसी के तहत चाईबासा में मेडिकल कालेज खोलने के लिए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के अथक प्रयास से इस योजना का शुभारम्भ मार्च 2019 में हुआ था. जानकारी के अनुसार यह 334 करोड़ की इस योजना निर्माण कार्य जनवरी माह से बंद है, जो आपके विभाग के स्थानीय पदाधिकारियों की अकर्मण्यता को दर्शा रहा है.
जांच का विषय
चाईबासा सदर अस्पताल परिसर के पुराने भवन को ध्वस्त कर दिया गया. ओपीडी के पूर्वी छोर के भवन को तोड़ दिया गया और दोनों स्थान में थोड़ा बहुत निर्माण कर पूरे अस्पताल परिसर को कचरे की ढेर बना कर मरीजों के आने जाने के रास्ते को पूरी तरह कीचड़मय बना कर यूं ही छोड़ दिया गया है. जीवन रक्षक आपातकाल सेवा के पहुंच पथ में जाना आना जानलेवा बन गया है. उसी प्रकार आचु में भी नाम मात्र का कार्य हुआ है. ऐसे में कार्य एजेंसी को कैसे और क्योंकर 15 करोड़ का भुगतान कार्यपालक अभियंता ने कर दिया. तोड़े गए भवन से निकले बिलडिंग मैटेरियल्स कहां गए? यह सभी जांच का विषय है. पश्चिम सिंहभूम जिला 90 प्रतिशत ग्रामीण जिला है, 80 प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग निवास करतें है. पूरे जिले में सरकारी या मुफ्त जन स्वास्थ्य सुविधा 150 बेड वाले एकमात्र सदर अस्पताल ही है जहां 24 घंटे मरीज इलाज के लिए आते हैं, जो डॉक्टरों के अभाव में काफी मुश्किल से चल रही है. मांग की गई है कि अविलंब चाईबासा मेडिकल कालेज निर्माण कार्य को पूर्ण करवाकर, इस क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य सुविधा देने सुनिश्चित करवाएं साथ ही किये गए 15 करोड़ राशि पर कार्य की संपन्नता की उच्चस्तरीय जांच करवाएं. पत्र की प्रतिलिपि-मुख्य सचिव,झारखंड सरकार,स्वास्थ्य सचिव,झारखंड सरकार को भी भेजी गई है.
रिपोर्ट: संतोष वर्मा, चाईबासा
