धनबाद(DHANBAD): धनबाद के नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह सोमवार को कार्यभार ग्रहण किया. 18 मार्च को उन्होंने शपथ ग्रहण किया था. आज ही के दिन डिप्टी मेयर अरुण चौहान ने भी कार्यभार ग्रहण किया. कार्यभार ग्रहण करना तो मात्र एक औपचारिकता थी. कार्यभार ग्रहण करने के बाद संजीव सिंह ने अपनी प्राथमिकता भी बताई और कहा कि सबको साथ लेकर आगे बढ़ने का काम वह करेंगे. उनकी विधायक पत्नी रागिनी सिंह भी साथ थी. जिस निगम कार्यालय में वह झरिया -धनबाद की समस्याओं को लेकर मांग पत्र के साथ जाती थी,आज पति के मेयर बनने पर साथ गई थीं.
नामांकन से चुनाव तक वह दुरी बनाकर चल रही थीं
यह अलग बात है कि निगम चुनाव में वह दूरी बना कर चल रही थी. पार्टी का उनपर दबाव था. नामांकन के दौरान न संजीव सिंह के नामांकन में हिस्सा लिया और न भाजपा समर्थित उम्मीदवार के नामांकन में. वह संजीव सिंह का चुनाव प्रचार भी नहीं किया। मतगणना के दिन भी वह दूरी बनाकर रही. यह अलग बात है कि संजीव सिंह से मिलने कोई अधिकारी या पदाधिकारी अथवा राजनेता सिंह मेंशन पहुंचता, तो वह साथ जरूर दिखती थी. लेकिन मेयर के नामांकन से लेकर चुनाव परिणाम तक वह दूर-दूर ही रही.
रागिनी सिंह की मौजूदगी के राजनीतिक सन्देश भी है
आज उनके जाने के कुछ राजनीतिक संकेत भी महसूस किये जा रहे हैं. अब कहा जाने लगा है कि संजीव सिंह को लेकर भाजपा का रुख अब नरम पड़ गया है. भाजपा प्रदेश कमेटी ने चुनाव और नामांकन के समय रागिनी सिंह पर दबाव बनाया कि वह संजीव सिंह को चुनाव नहीं लड़ने से मना लें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जिला से लेकर प्रदेश और प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक इस मामले में हस्तक्षेप किया , लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। संजीव सिंह बागी बनकर निगम के चुनाव में उतरे और भारी मतों से चुनाव जीतकर यह साबित कर दिया कि भाजपा से निर्णय लेने में कहीं न कहीं चूक हुई थी.
निगम चुनाव में भाजपा को नुकसान अधिक हुआ है
यह अलग बात है कि धनबाद निगम चुनाव में भाजपा को नुकसान अधिक हुआ है. संजीव सिंह ने सांसद ढुल्लू महतो के राजनीतिक विरोधी हरेंद्र चौहान के भाई अरुण कुमार चौहान को डिप्टी मेयर बनवाने में भी सफलता हासिल कर ली. इसके भी कई राजनीतिक मतलब निकाले गए हैं. दरअसल हरेंद्र चौहान झामुमो से जुड़े हुए हैं. ऐसे में अरुण चौहान का डिप्टी मेयर बना सत्ता के गलियारे तक पहुंचने का रास्ता आसान करना भी हो सकता है. यह बात तो निर्विवाद है कि सरकार के सहयोग के बिना धनबाद में विकास के कार्यों को गति नहीं मिल सकती है. यह बात मेयर संजीव सिंह भी जानते हैं.
रांची में मुख्यमंत्री से भी संजीव सिंह भेंट की थी
अपने रांची प्रवास के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की और उन्हें धनबाद में विकास का रोड मैप भी बताया। मुख्यमंत्री ने भी भरोसा दिया कि झारखंड सरकार धनबाद के विकास में हर संभव मदद करेगी। यह बात तो तय है कि संजीव सिंह की जीत ने धनबाद में भाजपा के सारे गणित को उलट पलट दिया है . वोटिंग के पहले प्रदेश समिति ने संजीव सिंह समेत झारखंड के 18 लोगों को नोटिस दिया था. जवाब मांगा था, किसने- किसने जवाब दिया, यह तो सार्वजनिक नहीं हुआ है ,लेकिन भाजपा ने कोई कार्रवाई नहीं की है. इधर, आज संजीव सिंह के कार्यभार ग्रहण करने के समय भाजपा विधायक रागिनी सिंह का जाना यह बता रहा है कि संजीव सिंह को लेकर भाजपा का रुख अब नरम पड़ गया है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो