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शहीद एसपी अमरजीत बलिहार की पुण्यतिथि, 2 जुलाई 2013 को नक्सलियों से लड़ते हुए दी थी शहादत  

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 12:47:22 AM

दुमका(DUMKA):15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग झारखंड राज्य बना. नवोदित राज्य को विरासत में मिला उग्रवाद और नक्सलवाद. समय-समय पर राज्य की धरती नक्सलियों की करतूत से लाल होती रही. कहीं पुलिस मुठभेड़ में नक्सली मार गिराए गए तो कहीं उग्रवादियों से लोहा लेते सुरक्षाकर्मी शहीद हुए.

शहीद एसपी अमरजीत बलिहार की पुण्यतिथि

राज्य बने लगभग 23 वर्ष होने को है. इन वर्षों में सरकारें आयी और गयी लेकिन नक्सलवाद की समस्या आज भी सरकार के समक्ष एक गंभीर चुनौती बनी है. वैसे हाल के बर्षों में देखें तो नक्सली उत्पात कुछ कम जरूर हुआ है. वजह या तो चोटी के नक्सली मारे गए या फिर सरकार की नीति से प्रभावित होकर मुख्य धारा में लौट गए. समय के साथ लोग भी जागरूक हुए और समझने लगे कि नक्सली अपने सिद्धान्त से भटक गया है. आज उग्रवादियों के मकशद शोषण और अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करना नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी योजना से लेवी वसूलकर अपनी तिजोरी भरना रह गया है.

2 जुलाई 2013 को नक्सलियों से लड़ते हुए दी थी शहादत

लेकिन इस सब के बीच नक्सलियों से लोहा लेते जिसने अपने प्राणों की आहुति दी उन्हें भला कैसे भुलाया जा सकता है. हम बात कर रहे हैं पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार की. 2 जुलाई 2013 को पाकुड़ के एसपी अमरजीत बलिहार नक्सलियों से लोहा लेते अपनी शहादत दी. घटना उस वक्त घटी जब दुमका में डीआईजी की बैठक में भाग लेकर एसपी अमरजीत बलिहार वापस पाकुड़ लौट रहे थे. दुमका जिला के काठीकुंड थाना क्षेत्र के जमनी मोड़ के समीप घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने एसपी अमरजीत बलिहार के काफिले पर हमला कर दिया.

देश पर कुर्बान कर दी थी जान

जब तक एसपी अमरजीत बलिहार संभलते तब तक नक्सलियों ने एसपी और उनके 5 अंगरक्षकों को मौत की नींद सुला दिया. पूरी घटनाक्रम में प्रशासनिक चूक भी सामने आयी. अपनों की ओर से दिया गया. धोखा की भी बात सामने आयी. घटना को अंजाम देने वाले ताला दा को दुमका पुलिस ने वर्ष 2019 में शिकारीपाड़ा के जंगल मे मार गिराया. तो कई नक्सली गिरफ्तार भी किए गए. कांड में शामिल दो नक्सलियों को निचली अदालत ने फांसी की सजा भी सुनाई.

दुमका पुलिस केंद्र में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

खैर! कहानी बहुत लंबी है. हम बात कर रहे है शहीद एसपी अमरजीत बलिहार की पुण्यतिथि की. आज 2 जुलाई है. देखते ही देखते एक दशक बीत गए. लेकिन कहा गया है. शहीदों के मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले. एसपी अमरजीत बलिहार की शहादत दिवस पर दुमका पुलिस केंद्र में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया.

शहीद एसपी अमरजीत को याद कर आंखें हुई नम

एसपी अम्बर लकड़ा, एसडीपीओ नूर मुस्तफा अंसारी, डीएसपी मुख्यालय बिजय कुमार सहित अधिकारियों और जवानों ने अमरजीत बलिहार की तस्वीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया. घटना को याद कर सबों की आंखें नम हो गयी. समय के साथ संथाल परगना प्रमंडल में नक्सली गतिविधि कम जरूर हुई है. लेकिन इस शांति को हलके में नहीं लेनी चाहिए. क्योंकि कहा जाता है कि तूफान आने के पूर्व शांति छा जाती है.

रिपोर्ट-पंचम झा

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