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झारखंड में अवैध भवन मालिकों को बड़ी राहत! 300 वर्गमीटर तक के निर्माण होंगे नियमित, ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 14, 2026, 12:57:59 PM

रांची (RANCHI): झारखंड के शहरी इलाकों में बिना नक्शा पास कराए या स्वीकृत मानचित्र से अलग निर्माण कराने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. राज्य सरकार ने ‘अनाधिकृत भवन नियमितीकरण योजना’ को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है. इस नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए अब भवन नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी. मंत्री सुदिव्य कुमार द्वारा लॉन्च किए गए इस पोर्टल का उद्देश्य प्रक्रिया को पारदर्शी, आसान और भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है. अब लोगों को फाइल आगे बढ़ाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. आवेदन, दस्तावेज अपलोड, शुल्क भुगतान और स्वीकृति जैसी सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी होंगी.

सरकार की इस पहल से सबसे बड़ा असर उन बिचौलियों पर पड़ेगा, जो अब तक नियमितीकरण के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूलते थे. विभागीय अधिकारियों के अनुसार पूरी प्रक्रिया को ‘एंड-टू-एंड डिजिटल’ बनाया गया है, ताकि आवेदक सीधे पोर्टल के माध्यम से अपनी फाइल की स्थिति देख सकें और उन्हें किसी मध्यस्थ की जरूरत न पड़े. योजना के तहत केवल उन्हीं भवनों को नियमित किया जाएगा, जिनका निर्माण अधिकतम 300 वर्गमीटर क्षेत्रफल तक हुआ है. इसके अलावा सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए जी प्लस टू (G+2) से ऊंचे भवन इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होंगे. आवेदन करते समय भवन का वर्तमान नक्शा, जमीन से जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी जानकारी ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य रहेगा.

पूरी प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी. सबसे पहले आवेदक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर दस्तावेज अपलोड करेंगे. इसके बाद विभागीय स्तर पर डिजिटल स्क्रूटनी होगी और सत्यापन के लिए अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया जाएगा. नियमों के उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर पोर्टल स्वतः शुल्क निर्धारित करेगा, जिसे ऑनलाइन जमा करना होगा. सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद डिजिटल स्वीकृति प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा. सरकार ने साथ ही साफ चेतावनी भी दी है कि यह योजना भविष्य में अवैध निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नहीं है. मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि इसका उद्देश्य पुराने और अनजाने में नियमों से बाहर रह गए भवनों को कानूनी दायरे में लाना है, ताकि शहरों को व्यवस्थित और बेहतर बनाया जा सके.

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