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कागजों में सिमटा पेसा कानून,तीन माह बाद भी नहीं शुरू हुई प्रक्रिया,  माझी-पारगना  ने उठाया सवाल 

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 7, 2026, 6:09:36 PM

 

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): माझी पारगना माहाल पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के अगुवाओं ने मंगलवार को पूर्वी सिंहभूम जिले के डीसी को ज्ञापन सौंपा. देश पारगना बाबा बैजू मुर्मू के नेतृत्व में सभी डीसी ऑफिस पहुंचे और अपनी मांगो को लेकर ज्ञापन दिया. ज्ञापन के माध्यम से गांवों में पेसा नियमावली 2025 को अविलंब विधिवत प्रक्रिया पूरी करते हुए लागू करने की मांग की गई. ज्ञापन में बताया गया कि पेसा नियमावली 2025 को 2 जनवरी 2026 को राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद झारखंड के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन में देरी हो रही है, जिसे लेकर पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से जुड़े अगुवाओं ने चिंता जताई.

अध्याय-2 के तहत ग्राम सभा का हो सीमांकन

अगुवाओं ने मांग की कि पेसा नियमावली के अध्याय-2 के तहत ग्राम सभा के सीमांकन, सत्यापन और प्रकाशन की जिम्मेदारी उपायुक्त को दी गई है. इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रखंड स्तरीय टीम में पारंपरिक पदाधिकारियों जैसे परगना बाबा, मानकी बाबा, हातु मुंडा और माझी बाबाओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम सभा की अन्य प्रक्रियाएं तभी शुरू हों, जब सीमांकन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो जाए. इसके अलावा ग्राम सभा की अध्यक्षता केवल अनुसूचित जनजाति के पारंपरिक प्रतिनिधियों जैसे माझी बाबा, परगना बाबा, हातु मुंडा और मानकी बाबा—द्वारा ही किए जाने की मांग रखी गई. गैर-आदिवासी ग्राम प्रधानों द्वारा अध्यक्षता पर रोक लगाने की भी बात कही गई.

अधिकारियों और पारंपरिक अगुवाओं को आदेश पत्र जारी

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि पंचायत राज विभाग के निर्देशों के अनुरूप प्रखंड स्तर पर संबंधित अधिकारियों और पारंपरिक अगुवाओं को आदेश पत्र जारी किया जाए. साथ ही पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पारंपरिक अगुवाओं को प्रशिक्षक बनाया जाए, ताकि वे स्थानीय भाषा में लोगों को जागरूक और प्रशिक्षित कर सकें. वही, 25 अप्रैल 2026 तक ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि जब तक ग्राम सभाओं का विधिवत सीमांकन, सत्यापन और प्रकाशन नहीं हो जाता, तब तक अन्य प्रक्रियाएं स्थगित रखी जाएं. इस दौरान कई पारंपरिक प्रतिनिधि मौजूद रहे.

रिपोर्ट-रोहित सिंह

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