✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

देखिये हुजूर-बिहार में नाम BIADA था, झारखंड में JIADA हो गया, इसके अलावा क्यों कुछ नहीं बदला, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 4:24:43 AM

धनबाद (DHANBAD) : बिहार की इस महत्वाकांक्षी इंडस्ट्रियल योजना को झारखंड क्या केवल ढो रहा है ? झारखंड जब बिहार से अलग हुआ तो यह प्रदेश खुश था कि उद्योग खुलेंगे और बेरोजगारी की समस्या ख़त्म हो जाएगी. लेकिन क्या ऐसा कुछ भी हुआ है ? BIADA का नाम बदल गया, अब हो गया है JIADA. इसके अलावा बहुत कुछ नहीं बदला है. विकास का ग्राफ डाउन वार्ड ही है. 1974 में बड़े ही तामझाम के साथ बोकारो में BIADA की स्थापना की गई थी. बाद में उसका नाम बदलकर JIADA कर दिया गया. इसके पास कुल 1470.59 एकड़ जमीन है. यह जमीन तीन जिलों में फैली हुई है. इसमें बोकारो बालिडीह औद्योगिक क्षेत्र, धनबाद का कांड्रा औद्योगिक क्षेत्र, सिंदरी औद्योगिक क्षेत्र के साथ-साथ गिरिडीह औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल है. 

जमीन की कमी और सहायता की मंशा भी एक बड़ी परेशानी 

एक आंकड़े के मुताबिक बलिडीह औद्योगिक क्षेत्र में 12,345 एकड़ जमीन, धनबाद के कांड्रा औद्योगिक क्षेत्र में 134.58 एकड़ जमीन, सिंदरी के औद्योगिक क्षेत्र में 55 एकड़ जमीन और गिरिडीह औद्योगिक क्षेत्र में 46.56 एकड़ जमीन शामिल है. तीन जिलों में फैले इस प्राधिकरण की जमीन पर फिलहाल 660 से अधिक इंडस्ट्रियल यूनिट मौजूद है. यह अलग बात है कि JIADA के बोकारो क्षेत्र में भूमि की कमी नए उद्योगों की स्थापना में एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है. भूमि अधिग्रहण नहीं होने से निवेशकों को जरूरत के हिसाब से जमीन नहीं मिल रही है. अनुपयोगी प्लॉट्स रद्द करने के बावजूद JIADA की तरफ नए निवेशक आकर्षित नहीं हो रहे है. 

कई एमएसएमई इकाइयां झेल रही है आर्थिक संकट 
 
बोकारो के बालिडीह में कई एमएसएमई इकाइयां आर्थिक संकट झेल रही है. बोकारो स्टील लिमिटेड से उन्हें पर्याप्त आर्डर नहीं मिल रहे है. सरकार भी एमएसएमई इकाइयों को बोकारो स्टील लिमिटेड से समर्थन दिलाने में बहुत सफल नहीं हो रही है. प्रयास तो कई किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली. जानकारी के अनुसार कुछ महीने पहले 20 टीमों का गठन कर बालिडीह औद्योगिक क्षेत्र में 400 औद्योगिक यूनिट का भौतिक निरीक्षण किया गया. यह कार्रवाई तब की गई, जब एक अवैध शराब फैक्ट्री को पानी की पैकेजिंग यूनिट की आड़ में चलाने का पता चला था. निरीक्षण के दौरान कई मनको की जांच की गई, जो इकाइयां बंद मिली, उन्हें नोटिस देकर जमीन आवंटन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई. उस समय बताया गया था कि बंद  इकाइयों के प्लॉट्स को रद्द करने के पीछे की मंशा यह है कि नए निवेशकों को आकर्षित किया जाए. रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिले.  

JIADA में स्थापित 660 में से केवल 417 ही कार्यशील, वह भी जैसे-तैसे 

लोग बताते हैं कि JIADA क्षेत्र को और आकर्षक बनाने के लिए कई बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है. यह अलग बात है कि कुछ महीने पहले नए उद्योगों की स्थापना के लिए JIADA ने काम शुरू किया. अंचल अधिकारियों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए पत्र जारी किये गए. बंद या अनुपयोगी प्लांट्स के आवंटन को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई. ऐसे प्लांट को  नोटिस जारी किया गया. इनमें वह प्लॉट शामिल हैं, जिनमें सालों  से कोई काम नहीं हुआ है. एक जानकारी के अनुसार JIADA की बोकारो क्षेत्र में 660 इकाइयों में से 417 ही कार्यशील है. 83  प्लॉट्स को रद्द कर दिया गया है. 40 इकाइयां बंद है. कुछ मामले न्यायालय में भी लंबित बताए जाते है. बता दें कि BIADA के  रूप में इसकी स्थापना 1974 में हुई थी, लेकिन उसके बाद इसका नाम बदल दिया गया और यह अब  JIADA के रूप में जाना जाता है. 

नए उद्योग लगाने के लिए उद्योग मालिकों को आकर्षित करना सबसे बड़ी चुनौती

JIADA के समक्ष भी चुनौतियां कम नहीं है. नए उद्योग लगाने के लिए उद्योग मालिकों को आकर्षित करना सबसे बड़ी चुनौती है. नए उद्योग के लिए जमीन की भी कमी है.  660 इकाइयों में से कई इकाइयां बंद है. एक आंकड़े के मुताबिक कार्यशील इकाइयां केवल 417 है. JIADA की बोकारो,धनबाद और गिरिडीह जिले में स्थापित इकाइयों को एक बार फिर जीवन दान देकर शुरू कर दिया जाए, नए उद्योगपतियों को आकर्षित किया जाए, तो रोजगार की दिशा में झारखंड में बहुत बड़ा काम हो सकता है. लेकिन यह काम सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ने से नहीं होगा. जमीन पर उतरकर काम करना होगा. देखना है 2024 में प्रचंड बहुमत के साथ आई हेमंत सोरेन की सरकार JIADA पर कितना ध्यान केंद्रित कर पाती है?

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 

Tags:DhanbadBokaroJIADAUnitConditions

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.