धनबाद(DHANBAD): विश्वास अर्जित करना कठिन है और उस विश्वास पर बने रहना उससे भी अधिक मुश्किल. धनबाद में अभी दो सरकारी अस्पताल हैं, एक की स्थिति है कि भर्ती होने के लिए बेड नहीं मिलता और दूसरे की हालत है कि बेड खाली ही रहता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं धनबाद के SNMMCH और सदर अस्पताल का. SNMMCH में बेड नहीं होते जबकि सदर अस्पताल में मरीज ही नहीं आते. पहले सरकारी अस्पताल कोर्ट रोड में ही था, जहां आज सदर अस्पताल संचालित है. लेकिन बाद में इसे सरायढेला में शिफ्ट कर दिया गया.
राजेंद्र बाबू की पहल पर शुरू हुआ था अस्पताल
कोयलांचल के कद्दावर नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह जब झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बने तो सदर अस्पताल की पहल शुरू कराई, उन्हीं की पहल और प्रयास से सदर अस्पताल शुरू हुआ. यह जानकर भी बहुतों को आश्चर्य होगा कि धनबाद में 2018 के पहले सदर अस्पताल नहीं था. अस्पताल जो चलता था उसे कॉलेज का अस्पताल कहा जाता था. इधर, सदर अस्पताल में अभी 24 घंटे चिकित्सा की सेवा उपलब्ध है. इसके लिए अस्पताल में अलग-अलग विभाग के 23 डॉक्टर नियुक्त है. एक आंकड़ा यह भी है कि अस्पताल की क्षमता 100 बेड की है, लेकिन अस्पताल में कुल 190 बेड इधर-उधर रखे गए हैं. जरूरत से अधिक भीड़ होने के कारण बेड जहां-तहां रख दिए गए हैं.
2018 में हुई थी सदर अस्पताल की शुरुआत
एक तरह से यह अस्पताल बेड का गोदाम बन गया है. 2018 में इस अस्पताल की शुरुआत हुई, उस दौरान केवल 60 बेड ही थे. कोरोना काल के दौरान इसे कोरोना वार्ड बनाया गया था और इस वजह से बेड की संख्या बढ़ाई गई थी. हो सकता है कि लोगों को इस अस्पताल की सुविधा की जानकारी नहीं हो. लेकिन, जानकारी देना भी तो अस्पताल प्रबंधन का ही काम है. अभी हाल ही में झारखंड के स्वास्थ्य अपर सचिव धनबाद दौरे पर थे. उन्होंने कहा था कि अगर धनबाद के सरकारी डॉक्टर नहीं सुधरे, तो मरीज सरकारी अस्पताल में आना ही छोड़ देंगे, तो क्या सदर अस्पताल के साथ कुछ ऐसा ही तो नहीं हो रहा है.
