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शराब माफिया योगेन्द्र तिवारी की मुश्किलें नहीं हो रही कम, ईडी की स्पेशल कोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 1:27:52 PM

टीएनपी डेस्क (Tnp desk):- झारखंड शराब घोटाला और इससे जुड़े मनी लांड्रिंग मामले के आरोपी योगेंद्र तिवारी जेल के सलाखों के पीछे खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए खूब जोर लगा रहा है. शराब का किंग पिन तिवारी ने तमाम कोशिशे काल कोठरी से बचने के लिए किया. लेकिन, आखिरकर ईडी की जद में आने के बाद जेल के अंदर चला गया. शनिवार को भी उसकी जमानत याचिका सुनवाई हुई. ईडी के स्पेशल जज पीके शर्मा ने सुनवाई करते हुए उसकी याचिक खारिज कर दी. इससे पहले सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा था.

योगेन्द्र तिवारी को ईडी ने किया था गिरफ्तार

 योगेन्द्र तिवारी को ईडी ने शिकंजा कसना तब शुरु किया था. जब इस घोटाले में उसके हाथ सामने आ रहे थे. प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड में हुए शराब घोटाले में करीब 40 करोड़ की मनी लांड्रिंग के आरोप में योगेंद्र तिवारी को 19 अक्टूबर को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था. योगेंद्र तिवारी पर न केवल मनी लॉन्ड्रिंग का आऱोप है, बल्कि परिवर्तन निदेशालय के अधिकारियों की जासूसी करने की भी तोहमत लगी हुई है. तिवारी को 20 अक्टूबर को पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया गया था. जहां पर उसे रिमांड पर भेज दिया गया था.

 23 अगस्त को ईडी ने मारा था छापा

ईडी ने 23 अगस्त 2023 को योगेंद्र तिवारी के ठिकानों के साथ-साथ शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के यहां छापा मारा था. उस दिन कुल 33 लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. इसे लेकर का फी हड़कंप मचा था . ईडी ने बड़ी मछली को पकड़ने के साथ-साथ उन लोगों के खिलाफ भी दबिश मारी. जिसमे इनके हिस्से की बू आती है. इसी कवायद में प्रवर्तन निदेशालय ने राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के घर पर भी छापा मारा था.

 शराब के कारोबार में योगेन्द्र का दखल

शराब के कारोबार में योगेंद्र तिवारी का अच्छा खासा दखल रहा है. उसका रुतबा ही था कि 19 जिलों में शराब के व्यापार पर उसका एकाधिकार था. उसने अपनी कंपनियों और दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर एक ग्रुप बनाया था. इसके साथ ही इन्हीं कंपनियों के सहारे राज्य के 19 जिलों में शराब के कारोबार पर अपना पैर जमा लिया था. इन सभी कंपनियों के लिए बैंक ड्राफ्ट एक ही जिले और बैंक की एक ही शाखा से बनाए गए थे. बताया जाता है कि ईडी की ओर से पूछताछ के दौरान योगेंद्र तिवारी एक जगह से बैंक ड्राफ्ट बनाने के क्रम का कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे सका था. साथ ही ड्राफ्ट बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए रूपयों के वैध स्रोत की जानकारी भी नहीं दे सका था. प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाले में ही योगेन्द्र के भाई अमरेन्द्र तिवारी से भी पूछताछ कर चुकी है. शराब कारोबार से जुड़े 50 से अधिक लोगों से पूछताछ से मिले साक्ष्य के आधार पर तिवारी को गिरफ्तार किया गया था.

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