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Life danger in coalfield - गोधर में आग मिश्रित ओवरबर्डेन से  छह झुलसे 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 6:57:41 PM

धनबाद(DHANBAD): कोयलांचल की "माटी" अब किसी को बकसने  के मूड में नहीं है.  राह चलते लोगों को निगल  रही है तो जमीन के ऊपर तो धूल, धुआ से तो खतरा है ही, आग  मिश्रित ओवरबर्डेन   भी लोगों को झुलसा रहे है.  गोंदूडीह  में तीन महिलाओं के जिंदा दफन के बाद भी बहुत कुछ सुधार या पुनर्वास के काम में तेजी कहीं दिख नहीं रही  है.  बुधवार की सुबह अभी सूरज की लालिमा भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई थी कि आग  मिश्रित ओवरबर्डेन  ने  अपना रूप दिखा दिया कम से कम आधा दर्ज़न युवक ,युवती और बच्चे  बुरी तरह झुलस गए है.  घटना हुई है गोधर  काली मंदिर के समीप. गोधर  डंपिंग यार्ड रोड में आग  मिश्रित ओवर बर्डेन  को इकट्ठा किया जाता है.  

आग मिश्रित ओवरबर्डेन  से झुलसे छह लोग 

आज जैसे ही ओवरबर्डेन वहां रखा गया, शौच  को गए लोगो पर   यह ओवरबर्डेन पर  पूरी तरह से तो नहीं लेकिन छिटककर  गिर पड़ा.  नतीजा हुआ कि सभी झुलस गए, चार को धनबाद के SNMMCH भर्ती कराया गया है, जबकि दो का इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है.   इस घटना से लोगों में आक्रोश है और लोग आउटसोर्सिंग कंपनी को इसके लिए जिम्मेवार बता रहे है.  लोगों की माने तो गोधर  काली मंदिर इलाके में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है, जिस वजह से लोग इधर-उधर शौच  को जाते है.  अगर यह सही है तो धनबाद नगर निगम के दावे को भी एक बार जांचने  की जरूरत है. 104 साल से इंतजार करते-करते झरिया की सुलगती भूमिगत आग,अब "धधकने" लगी है.1919 में झरिया के भौरा में भूमिगत आग का पता चला था.यह भूमिगत आग अब "कातिल" हो गई है.

भूमिगत आग पिछले 25 सालों से दे रही है संकेत 
 
वैसे पिछले 25 सालों से वह संकेत दे रही है कि हालात बिगड़ने वाले हैं. लेकिन जमीन पर ठोस काम करने के बजाए हवाबाजी होती रही. अभी हाल ही में झरिया के घनुडीह का रहने वाला परमेश्वर चौहान आग से फटी जमीन के भीतर गिर गया था. कड़ी मेहनत के बाद 210 डिग्री तापमान के बीच से अवशेष को बाहर निकाला गया. यह काम NDRF की टीम ने की. झरिया की यह आग 1995 से ही संकेत दे रही है कि अब उसकी अनदेखी खतरनाक होगी. 1995 में झरिया चौथाई कुल्ही में पानी भरने जाने के दौरान युवती जमींदोज हो गई थी. 24 मई 2017 को इंदिरा चौक के पास बबलू खान और उसका बेटा रहीम जमीन में समा गए थे. इस घटना ने भी रांची से लेकर दिल्ली तक शोर मचाया ,लेकिन परिणाम निकला शून्य बटा सन्नाटा. 2006 में शिमला बहाल में खाना खा रही  महिला जमीन में समा गई थी. 2020 में इंडस्ट्रीज कोलियरी में शौच के लिए जा रही महिला जमींदोज हो गई थी.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो

Tags:dhanbadgodharfirejhulsehospitalise

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