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रांची के डॉक्टर के साथ LIC ने कर दिया खेल, खाते से गायब हो गया पैसा

BY -
Varsha Varma CE
Varsha Varma CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 6, 2026, 8:28:01 PM

रांची(RANCHI): राजधानी से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की क्लेम प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि एक वरिष्ठ चिकित्सक के मैच्योर हो चुके निवेश को बिना उनकी जानकारी के किसी अन्य व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया.

सदर अस्पताल रांची में पदस्थापित सर्जन डॉक्टर अजीत कुमार ने दिसंबर 2009 में एलआईसी के दो बॉन्ड खरीदे थे, प्रत्येक 20-20 हजार रुपये के. इनकी मैच्योरिटी दिसंबर 2019 में पूरी हो चुकी थी. लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान सदर अस्पताल के कोविड वार्ड में उनकी अत्यधिक व्यस्तता के कारण वे समय पर क्लेम प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके. इस दौरान उनके एजेंट उदय कुमार सिंह की ओर से भी कोई रिमाइंडर या सूचना नहीं दी गई.

डॉक्टर का कहना है कि व्यस्तता और जानकारी के अभाव में वे अपने निवेश की स्थिति पर ध्यान नहीं दे सके, जिसके चलते उनका क्लेम लंबित रह गया. मामले ने तब गंभीर मोड़ लिया जब हाल ही में, दो दिन पहले, उन्होंने अपने एलआईसी बॉन्ड के बारे में जानकारी ली. उन्हें बताया गया कि उनका पैसा वर्ष 2020 में ही निकाला जा चुका है. इस जवाब से वे हैरान रह गए और आगे की जांच शुरू की गई.

जांच में सामने आया कि शिवाजी नगर बूटी मोड़ इलाके में रहने वाले एक अन्य व्यक्ति, जिनका नाम भी अजीत कुमार बताया जा रहा है, ने कथित रूप से बॉन्ड दस्तावेज गुम होने का हलफनामा (affidavit) देकर राशि अपने एसबीआई खाते में ट्रांसफर करवा ली. यह खाता होटवार दीपा टोली ब्रांच से जुड़ा बताया जा रहा है.

इस खुलासे के बाद पूरे मामले में गड़बड़ी और मिलीभगत के आरोप लगने लगे हैं. डॉक्टर अजीत का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में न केवल एजेंट बल्कि एलआईसी के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह है. उनका आरोप है कि इतनी बड़ी वित्तीय प्रक्रिया में न तो आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य जरूरी दस्तावेजों की ठीक से जांच की गई और न ही क्लेम करने वाले खाताधारक से कोई संपर्क किया गया. यहां तक कि उन्हें किसी प्रकार की सूचना या नोटिस भी नहीं भेजा गया.

इस पूरे घटना ने एलआईसी की कार्यप्रणाली और सत्यापन प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर बिना उचित पहचान सत्यापन के इतनी बड़ी रकम किसी अन्य खाते में कैसे ट्रांसफर हो गई. डॉक्टर ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और कहा है कि इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है.

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