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धनबाद में फिर भू-धंसान का कहर, टांडाबाड़ी बस्ती 4 फीट धंसी, खुले आसमान तले रहने को लोग मजबूर

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 22, 2026, 4:28:50 PM

धनबाद (DHANBAD): जिले के खतरनाक भू-धंसान क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जिंदगी एक बार फिर दहशत के साये में आ गई है. सोनारडीह ओपी क्षेत्र स्थित टांडाबाड़ी बस्ती में बुधवार सुबह करीब 5:30 से 6 बजे के बीच अचानक जमीन धंसने की बड़ी घटना सामने आई. इस हादसे में पूरी बस्ती करीब 4 फीट तक नीचे धंस गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकलने को मजबूर हो गए.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जमीन अचानक दरकने लगी, जिसके बाद लोगों ने तुरंत अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थान की ओर भागना शुरू किया. इस भू-धंसान के कारण कई घरों, एक मंदिर और पीसीसी सड़कों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं. हालात इतने गंभीर हैं कि लोग अब अपने ही घरों में जाने से डर रहे हैं.

गौरतलब है कि 31 मार्च 2026 को भी इसी इलाके में भू-धंसान की घटना हुई थी, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी. उस समय बीसीसीएल और जिला प्रशासन ने प्रभावित लोगों के पुनर्वास का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि विस्थापन सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है.

ताजा घटना के बाद हालात और भी गंभीर हो गए हैं. बस्ती के लोग अपने परिवार और छोटे बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं. कई घंटे बीत जाने के बावजूद न तो बीसीसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे और न ही कोई राहत व्यवस्था शुरू की गई, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है.

ग्रामीणों का कहना है कि पिछली घटना को लगभग 20 दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक न तो स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की गई और न ही कोई सुरक्षित विकल्प दिया गया. उनका आरोप है कि बीसीसीएल ने अपने कर्मचारियों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया, जबकि आम लोगों को खतरे के बीच छोड़ दिया गया है. यह भी कहा जा रहा है कि राहत शिविर बंद कर दिए गए हैं, जिसके कारण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भोजन और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रहे हैं. फिलहाल, प्रभावित लोग प्रशासन और बीसीसीएल से तत्काल राहत, सुरक्षित पुनर्वास और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें इस भयावह स्थिति से निजात मिल सके.

रिपोर्ट : नीरज कुमार

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