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‘एक आंख में काजल, दूसरी में सूरमा, चरितार्थ हो गया’ कांग्रेस में अंदरूनी कलह के बीच वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कसा तंज

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 4, 2026, 5:38:37 PM

रांची (RANCHI): पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के रुझानों के बीच कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. झारखंड में पार्टी की अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक होती दिख रही है. राज्य के वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश प्रभारी के राजू को एक तीखा पत्र लिखकर संगठन के फैसलों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

अपने पत्र में राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश कांग्रेस के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए लिखा कि पार्टी में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “एक आंख में काजल और दूसरी में सूरमा” वाली स्थिति बन गई है. उनके अनुसार, कार्यकर्ता यह जानना चाहते हैं कि बड़कागांव क्षेत्र के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को आखिर किस वजह से तीन साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया, जबकि दूसरी ओर रमा खलको को, जिन्होंने सार्वजनिक तौर पर पार्टी और नेतृत्व की आलोचना की थी, चुनाव प्रबंधन समिति में शामिल कर लिया गया.

उन्होंने अपने पत्र में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आकार पर भी सवाल उठाए. किशोर ने लिखा कि 81 सीटों वाली झारखंड विधानसभा के लिए 300 से अधिक सदस्यों की समिति कितनी प्रभावी होगी, यह समय ही बताएगा. उन्होंने सुझाव दिया कि “जंबो” कमेटी बनाने के बजाय पार्टी को प्रदेश नेतृत्व को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, तभी संगठन को मजबूती मिल सकती है. किशोर ने यह भी कहा कि हाल के चुनावी नतीजों से कांग्रेस को सबक लेने की जरूरत है. खासकर असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मिली हार के बाद संगठन को आत्ममंथन करना चाहिए. उनका मानना है कि जब तक नेतृत्व स्तर पर स्पष्ट और मजबूत फैसले नहीं लिए जाएंगे, तब तक पार्टी की स्थिति में सुधार मुश्किल है.

हालांकि, उनके इस पत्र के सामने आने के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं. योगेंद्र साव को 20 मार्च को पार्टी से बाहर किया गया था, लेकिन किशोर ने इस पर अब तक चुप्पी क्यों साधे रखी. इसी तरह, प्रदेश कांग्रेस कमेटी की घोषणा 3 मई को हुई, फिर भी उन्होंने विधानसभा चुनावों के रुझान आने तक प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष का उभरना तय था. अब यह असंतोष खुलकर सामने आने लगा है, जो आने वाले समय में पार्टी के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है.

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