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जानिए ठाकुर अनुकूलचंद जी की क्यों निकाली जाती है शोभा यात्रा, कहां से आए थे ठाकुर अनुकूलचंद, पढ़िए विस्तार से

देवघर (DEOGARH) : देवघर में आज यानि 2 सितंबर को ठाकुर अनुकूलचंद जी का इनके अनुयायियो द्वारा भव्य शोभा यात्रा निकाली गयी. इनके द्वारा स्थापित सत्संग आश्रम से इनके अनुयायियों द्वारा निकाली गयी विशेष शोभा यात्रा शहर के विभिन्न चौक-चौराहे से बैंड-बाजा के साथ नाचते गाते वापस आश्रम पहुंचा. श्री श्री ठाकुर या ठाकुर अनुकूलचंद जी के नाम से विख्यात अनुकूलचंद चक्रवर्ती का जन्म 14 सितंबर 1888 को वर्तमान में बांग्लादेश के पावना जिला के हेमायतपुर में हुआ था. बाद में वो देवघर आये और यहां सत्संग आश्रम की स्थापना की. मानव सेवा करने के दौरान 27 जनवरी 1969 को उनकी मृत्य देवघर में हुई थी. आज इनके लाखों अनुयायी देश विदेश में है.

आगमन दिवस पर निकाली जाती है शोभायात्रा

आपको बता दे की बंगलादेश के पावना जिले से आज ही के दिन 1946 में ठाकुर अनुकुलचंद जी देवघर आये थे और इनके द्वारा यहां सत्संग आश्रम की स्थापना की गयी थी. तभी से लेकर आज तक आज के दिन इनके अनुयायियों द्वारा आज देवघर आगमन दिवस के रुप में इनकी शोभा यात्रा निकाली जाती है. इस वर्ष इनका 78 वां शुभआगमन दिवस मनाया जा रहा है जिसमे देश,विदेश से हजारो लोग शामिल हुए. आगमन दिवस पर भीड़ का आलम यह था कि सड़क पर दूर दूर तक इनके अनुयायी ही अनुयायी दिख रहे थे. जहां जहां इनके अनुयायी है वहाँ वहाँ की पारंपरिक ड्रेस और बैंड बाजा के साथ शोभायात्रा निकाली गई.

भीड़ में सांड़ के कुछ खलल डाला

आगमन दिवस पर निकली शोभायात्रा यात्रा धीरे धीरे आश्रम की ओर बढ़ रहा था. ठाकुर अनुकूलचंद जी के अनुयायी मस्ती में भजन कीर्तन और नृत्य कर रहे थे. अचानक एक सांड़ भीड़ में घुस गया और देखते ही देखते अफरा तफरी का माहौल बन गया. भीड़ से निकलने की कोशिश में सांड़ ने लोगो को परेशान करना शुरू किया. थोड़ी देर में उसको रास्ता मिल गया और सांड़ भीड़ से बाहर निकल गया।गनीमत रही कि सांड़ पागल नही हुआ और उपद्रव नही किया नही तो हज़ारों हज़ार की भीड़ में आज एक बड़ा हादसा हो सकता था. इस शोभायात्रा में स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी भाग लिया जाता है.

2 सितंबर को ठाकुर अनुकूलचंद जी का हुआ था आगमन

पावना जिला में जन्म लेने के बाद प्रारंभिक शिक्षा वही से हुई फिर वो कोलकाता में अपनी उच्च स्तरीय पढ़ाई की. 1911 में कोलकाता में ही गरीबों की सेवा करने लगे. चिकित्सक, दार्शनिक और आध्यात्मिक रुप से लोगो को शिक्षित और दीक्षित करने लगे. यही कारण है कि वे लोगो के बीच जल्द ही मशहूर हो गए और लोगो ने इन्हें अपना गुरु मान लिया. 2 सितंबर 1946 को ये बाबानगरी देवघर आये थे और इनके द्वारा सत्संग आश्रम की स्थापना की गई थी. उस दिन से लेकर आज तक देश विदेश के इनके अनुयायियों का देवघर आना जाना लगा है. आज इनके लाखों लाख देशी विदेशी अनुयायी है.

रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा 

 

Published at: 02 Sep 2023 11:02 AM (IST)
Tags:Thakur AnukulchandShobha YatraDOGARHJHARKHANDNEWSJHARKHANDUPDATETHENEWSPOST

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