धनबाद(DHANBAD): कबाड़ का उपयोग कर धनबाद के अर्जुन रामपाल झारखण्ड के विजेता बन गए है. उनकी कलाकारी का शोर केवल धनबाद और झारखंड में ही नहीं है, चाइना, बंगाल और दिल्ली पहुंच गया है. उनकी मेहनत और वर्षों की तपस्या अब रंग लाने लगी है. मां की सीख उन्हें आज काम आ रही है. उनकी मां ने उन्हें बताया और सिखाया था कि बिना पैसे के भी बहुत कुछ काम किए जा सकते है.
परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं रहने के कारण बहुत सारे नए नए सामान जब वह खरीदने में असमर्थ रहते तो मां कहती है कि कबाड सामानों से ही कुछ बनाओ, कुछ उपयोग करो और कुछ नया करने की कोशिश करो और मां की यही सीख आज अर्जुन रामपाल को विजेता बना दिया है. उन्हें झारखंड स्वच्छता प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है. अर्जुन रामपाल गर्व से कहते हैं कि मां से सीखी कलाकारी का आज वह बखूबी उपयोग कर रहे है. उनकी कलाकारी चाइना तक पहुंच गई है. दिल्ली भी गई है, बंगाल में भी वह कुछ काम कर रहे है.
आपको बता दें कि अर्जुन रामपाल धनबाद क्लब के ठीक सामने कबाड़ टायर से हाथी की प्रतिमा बनाई, जो आज सेल्फी प्वाइंट बन गया है. इतना ही नहीं, धनबाद के प्रसिद्ध एसएसएलएनटी महिला कॉलेज के पास उन्होंने घुड़सवारी करती महिला की प्रतिमा वेस्ट मटेरियल से बनाई, जिसकी चर्चा होती है. उनके इसी प्रयासों के लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया है. अर्जुन रामपाल निगम प्रशासन को धन्यवाद करते हैं और कहते हैं कि उनके सहयोग से ही यह सब संभव हो पाया है. उनकी पत्नी नीतू रामपाल ,जो पेशे से टीचर रही है ,कहती हैं कि उन्हें तब बहुत अधिक प्रसन्नता मिलती है ,जब यह किसी प्रतिमा को अंतिम रूप देकर घर लौटते है. वह हमेशा उन्हें प्रोत्साहित करती रहती है और आगे कुछ नया नया करने का आग्रह करती रहती है.
