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पिछले दिनों चर्चा का विषय बना रहा झामुमो का 44वां झारखंड दिवस, जानिए कौन से विधायक ने संभाला कार्यक्रम का दामोदार तो कौन से विधायक रहें नदारद

पिछले दिनों चर्चा का विषय बना रहा झामुमो का 44वां झारखंड दिवस, जानिए कौन से विधायक ने संभाला कार्यक्रम का दामोदार तो कौन से विधायक रहें नदारद

दुमका (DUMKA) : दुमका से धनबाद तक झामुमो का स्थापना दिवस समारोह सम्पन्न हो गया. देखा जाए तो झामुमो का स्थापना दिवस 4 फरवरी को धनबाद में मनाया गया जबकि 2 फरवरी को दुमका के गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम को पार्टी झारखंड दिवस के रूप में प्रत्येक वर्ष मानती है. कहा जाता है कि 44 वर्ष पूर्व 2 फरवरी को शिबू सोरेन पहली बार दुमका की धरती पर सभा को संबोधित किया था, जिसमें अलग राज्य की मांग की गई थी. समय के साथ अलग झारखंड राज्य बना लेकिन झामुमो द्वारा झारखंड दिवस मनाने की परंपरा आज भी कायम है.

इस साल का झारखंड दिवस रहा अलग

इस वर्ष दुमका के गांधी मैदान में आयोजित झारखंड दिवस कई मायने में अलग रहा. कोरोना संक्रमण के दौर में 2 वर्ष तक यह कार्यक्रम सांकेतिक रूप में ही मनाया गया था. इस वर्ष पूरे संथाल परगना प्रमंडल के नेता और कार्यकर्ता का उत्साह चरम पर देखने को मिला. पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधि के साथ-साथ टिकट की चाहत रखने वाले कार्यकर्ताओं के लिए यह आयोजन पार्टी आलाकमान के समक्ष भीड़ का प्रदर्शन करने का एक बेहतर मंच होता है. इसलिए सभी अपने-अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे. यही वजह रही कि इस वर्ष भीड़ ने तमाम पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया. ऐतिहासिक गांधी मैदान भी छोटा पड़ गया. कड़ाके की ठंड के बाबजूद लोग अपने नेता को सुनने के लिए खुले आसमान की नीचे बैठे रहे.

कार्यक्रम रहा सफल 

इस वर्ष के कार्यक्रम को सफल बनाने का श्रेय पार्टी के युवा विधायक, सांसद और कार्यकर्ता को जाता है. सबसे पहले तो दुमका के गांधी मैदान में कार्यक्रम होने के कारण सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्थानीय विधायक सह युवा मोर्चा के अध्यक्ष बसंत सोरेन के कंधों पर थी. बसंत सोरेन लगभग एक सप्ताह से क्षेत्र में कैम्प कर रहे थे. अपने विधानसभा क्षेत्र में सघन दौरा के साथ-साथ पूरी व्यवस्था पर नजर बनाए हुए थे. चूंकि यह कार्यक्रम प्रमंडल स्तर पर होता है. इसलिए इसे सफल बनाने में राजमहल सांसद बिजय हांसदा और लिट्टीपाड़ा के युवा विधायक साइमन मरांडी के पुत्र दिनेश विलियम मरांडी ने जी तोड़ मेहनत किया. आगामी चुनाव में टिकट की चाहत रखने वालों में शिकारीपाड़ा विधायक नलीन सोरेन के पुत्र आलोक सोरेन और सारठ से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता के पुत्र प्रशांत शेखर भोक्ता ने जमकर पसीना बहाया.

बसंत सोरेन के कंधों पर रही जिम्मेदारी

इस वर्ष के कार्यक्रम में बसंत सोरेन के कंधों पर जिम्मेदारी सौपकर उनके अग्रज सह सीएम हेमंत सोरेन निश्चिन्त नजर आए. यह सही है कि हेमंत सोरेन राज्य के सीएम हैं और उनके लिए राज्य के सभी जिले और विधानसभा एक समान है. लेकिन उसके पूर्व वे दिसोम गुरु शिबू सोरेन के पुत्र होने के साथ-साथ पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष भी है. इसलिए संगठनात्मक स्तर पर उनकी जो सहभागिता होनी चाहिए वो इस वर्ष नहीं दिखा. ना तो वे जनवरी में इस कार्यक्रम को लेकर आयोजित प्रमंडलीय बैठक में पहुंचे और ना ही कार्यक्रम से एक दिन पूर्व पहुंच कर कार्यक्रम स्थल का जायजा लिया. जो अक्सर वो किया करते थे. 2 फरवरी को दोपहर दुमका पहुंचने के बाबजूद रात्री में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और सभा को संबोधित किया. जबकि इसके पूर्व हेमंत सोरेन एसपी कॉलेज परिसर से जुलुश की शक्ल में आने वाले कार्यकर्ताओं के स्वागत में पोखरा चौक पर खड़े रहते थे और सिदो कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद जुलुश में शामिल होकर कार्यकर्ताओं के साथ गांधी मैदान पहुंचते थे.

पार्टी के एक विधायक रहे कार्यक्रम से नदारद 

संथाल परगना प्रमंडल के झामुमो कार्यकर्ता के लिए झारखंड दिवस किसी उत्सव से कम नहीं है. प्रमंडल के सभी 18 विधानसभा के वर्तमान और पूर्व विधायक के साथ साथ पूरे राज्य के झामुमो विधायक और सांसद मंच पर आसीन होते है. लेकिन इस वर्ष संथाल परगना प्रमंडल के एक विधायक पूरे कार्यक्रम से अपने आप को दूर रखा. ना तो वे प्रमंडल स्तरीय बैठक में शरीक हुए और ना ही झारखंड दिवस कार्यक्रम में. पार्टी गाइड लाइन के विपरीत वे सिदो कान्हू की जन्मभूमि भोगनाडीह में आयोजित कार्यक्रम का नेतृत्व करते नजर आए.  अब आप समझ ही गए होंगे उस विधायक का नाम. नहीं समझ पाए तो हम ही आपको बता देते हैं. उनका नाम है लोबिन हेम्ब्रम. बोरियो से झामुमो के विधायक है। पार्टी के कद्दावर नेता माने जाते है. लेकिन वर्तमान सरकार के गठन के बाद से ही वे कई मौके पर अपनी ही सरकार और संगठन को आइना दिखाते रहे है. झामुमो के चुनावी वादों को पूरा करने के लिए वे झारखंड बचाओ मोर्चा के गठन कर उसके अगुआ बने हुए है. कार्यक्रम में शरीक नहीं होने को लेकर संगठनात्मक स्तर पर उनपर क्या कार्यवाई होती है यह देखना दिलचस्प होगा. वैसे 1 फरवरी को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक बसंत सोरेन से लोबिन हेम्ब्रम के बाबत सवाल पूछा गया था तो उन्होंने दो टूक कहा था कि 2 फरवरी के कार्यक्रम को लेकर प्रेसवार्ता आयोजित है। उससे जुड़े सीधा सवाल करें. लबिन हेम्ब्रम की सरकार और संगठन से बढ़ती दूरी को देख कर कयास लगाए जा रहे थे कि विकल्प के तौर पर भाजपा नेता हेमलाल मुर्मू को झामुमो में वापसी कराएगी और उसके लिए 2 फरवरी के मंच सबसे उपयुक्त माना जा रहा था. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं.

शांतिपूर्ण तरीके से हुआ झामुमो का 44वां झारखंड दिवस सम्पन्न

खैर, जो भी हो शांतिपूर्ण तरीके से झामुमो का 44वां झारखंड दिवस सम्पन्न हो गया और इतने बड़े आयोजन के बाबजूद शहर की ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर जनजीवन सामान्य बना रहा इसके लिए प्रसासन बधाई के पात्र है.

रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका

Published at:05 Feb 2023 10:49 AM (IST)
Tags:JMM's 44th Jharkhand DayMLA took charge of the program and which MLA remained absentdumkadumka newsjharkhand latest newsthe news post
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