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झारखंड का खनन माफिया 34 माह से फरार!ED-CBI सब हो गई फेल!कैसे हुआ था एक हजार करोड़ का खेल 

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 19, 2026, 7:24:46 PM

रांची(RANCHI): झारखंड में अब तक के सबसे बड़े घोटाले के आरोपी को ढूँढने में ईडी और सीबीआई की सांस फूलने लगी. 34 माह बीत गए लेकिन अब तक नीबू पहाड़ में अवैध खनन का आरोपी कहा है इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है. अब तक दर्जनों समन ईडी सीबीआई ने किया. लेकिन इस समन का कोई जवाब नहीं मिला. अब सवाल उठने लगा की आखिर बड़े बड़े नेताओं को जेल तक पहुंचाने वाली एजेंसी एक माफिया के सामने कैसे बैक फुट पर आगई. आखिर दाहू यादव पर किसका हाथ है. जिससे वह अब तक बचता आरहा है. आखरी बार 18 जुलाई 2022 को वह ईडी के सामने पेश हुआ था.इसके बाद कोई जानकारी नहीं है. आखिर वह कहा है क्या देश छोड़ कर भाग गया. कई सवाल है जिसका जवाब फिलहाल किसी एजेंसी या पुलिस के पास नहीं है. 

आज इस रिपोर्ट में अवैध खनन पर बात करेंगे. साल 2022 में ईडी अवैध खनन मामले में एक्शन में आई. कई बड़े नाम तक इसकी जांच पहुंची. दर्जनों गिरफ्तारियाँ हुई. ईडी ने इस केस में खुलासा किया कि साहिबगंज में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ. जिसमें ट्रेन से भी पत्थर को बाहर भेजे गए साथ ही फेरि नाव के जरिए बांग्लादेश तक अवैध खनन कर पत्थर को पहुंचाया गया. जिसमें एक पूरा सिस्टम काम कर रहा था. पूरी व्यवस्था बनाई गई थी. जहां बे रोक टोंक पूरा पहाड़ पाँच साल में गयाब कर दिया गया. इस अवैध खनन मामले में दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. लेकिन दाहु यादव सामने नहीं आया. जबकि इसपर गंभीर आरोप है.       

सबसे बड़ी बात की गंगा नदी पर जिस फेरि बोट का इस्तेमाल किया जा रहा था. वह भी दाहु यादव की थी. जिसका कोई दस्तावेज नहीं था और ना ही कोई परमिट. इसके बावजूद बड़े ही आराम से देश साहिबगंज में चलाए जा रहे थे. इस फेरि बोट को भी ईडी ने जब्त किया था. नीबू पहाड़ पहुंच कर कई बार जांच की गई. लेकिन हर बार खाली हाथ एजेंसी वापस लौटी. 

इस बीच ही उसके घर की कुर्की हुई पिता से लेकर परिवार के कई लोगों को गिरफ्तार किया गया. जिससे दाहु यादव सरेंडर करें इन सब के बावजूद वह आज तक हाजिर नहीं हुआ. अब इस गायब होने के पीछे की भी कई कहानी है. कहा जाता है कि अगर यह पकड़ा जाता तो इससे कई लोगों की मुस्किल बढ़ सकती थी. यही वजह है कि पूरे सिस्टम ने मिल कर उसे झारखंड से बाहर भेजने में अपनी भूमिका निभाई. 

अगर दाहु यादव की बार करें बात करें तो इसके ऊपर 100 से ज्यादा कार्रवाई हो चुकी है. दर्जनों मुकदमे में आरोपी है. ईडी सीबीआई की विशेष अदालत से दर्जनों नोटिस भेजे जा चुके है. लेकिन सभी को वह इग्नोर करता गया. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक माफिया के आगे सब फेल कैसे हो गए. एक ऐसी पवार फूल एजेंसी जिसने राज्य की सत्ता में बैठे सीएम तक कोई गिरफ्तार कर लिया उसके हाथ से दाहु कहा फरार हो गया. आखिर कैसे वह गिरफ्त में आएगा.

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