धनबाद(DHANBAD): अपराधी से सफेदपोश बने जमशेदपुर के हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा बड़ा कारोबारी बन देहरादून में रह रहा था. उत्तराखंड के देहरादून के लोग विक्रम शर्मा को सफल और बड़ा कारोबारी समझकर सलाम ठोकते थे. उसकी जब कलई खुली तो लोग आश्चर्य में पड़ गए. वह असल में झारखंड के जमशेदपुर का हिस्ट्रीशीटर निकला। शुक्रवार को दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी गई. हत्या करने वाले भी जमशेदपुर के ही शूटर बताए जाते है. फिलहाल वह देहरादून में रह रहा था. सूत्र दावा कर रहे हैं कि देहरादून के अलावे झारखंड में भी उसने अकूत संपत्ति अर्जित की है. इस धन को सफेद करने के लिए उसने उत्तराखंड को चुना था. पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है ,नए-नए खुलासे हो रहे हैं.
जांच में यह पता चला है कि पुलिस की नजरों से बचने के लिए वह किराए के लग्जरी फ्लैट में रह रहा था. वह कई पॉश इलाकों में आलीशान फ्लैट में भी रह चुका है. उसका ठिकाना बदलता रहता था. सूत्रों पर भरोसा करें तो विक्रम शर्मा अपने अपराध गैंग को कॉर्पोरेट स्टाइल में चलाता था. वह जहां भी जाता, लग्जरी कारों का काफिला चलता। वह हमेशा टिप टॉप रहता था. गले में कई भारी चैन, ब्रांडेड कपड़े, स्पोर्ट्स शू और कलाई पर लाखों की घड़ी पहनता था. बातें छनकर बाहर आ रही है कि वह काले कारनामों से अर्जित धन से दिल्ली ,हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में संपत्ति भी खरीदी थी. इन संपत्तियों के लिए अलग-अलग नाम से कागजात भी बनवाए गए थे. पुलिस सूत्रों के अनुसार दुमका जेल में बंद रहने के बावजूद अखिलेश सिंह अपने सहयोगियों के माध्यम से संपर्क बनाए रखता था.
सूत्रों के अनुसार अपराधी से "सफेदपोश " बने झारखंड के जमशेदपुर के विक्रम शर्मा पर दर्जन भर मामले दर्ज थे. इन दिनों वह सभी मामलों में जमानत पर था. शुक्रवार की सुबह उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में विक्रम शर्मा को गोलियों से भून दिया गया. माना जा रहा है कि विक्रम शर्मा हत्याकांड का तार झारखंड के जमशेदपुर से जुड़ा हुआ है. उत्तराखंड में जाकर तो विक्रम शर्मा कारोबारी बन गया था. वहां किसी से दुश्मनी की बात अभी तक सामने नहीं आई है. घटना सुबह 10:00 बजे की है.
पुलिस के अनुसार कई दिनों तक रैकी करने के बाद इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया है. विक्रम शर्मा रोज की तरह जिम में कसरत करने गया था. लेकिन उसे नहीं मालूम था कि उसकी टोह शूटर लगे हुए है. मौत उसका बाहर इंतजार कर रही है. जैसे ही विक्रम शर्मा जिम से बाहर निकला और नीचे जाने के लिए सीढ़ियों पर कदम रखा, हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. उसे सटाकर तीन गोलियां मारी गई. बताया जाता है कि हमलावरों ने विक्रम शर्मा को कोई मौका नहीं दिया। मौके पर उसकी मौत हो गई. जानकारी के अनुसार विक्रम शर्मा की हत्या करने तीन अपराधी पहुंचे थे. दो शूटर थे जबकि एक बाहर में उनका इंतजार कर रहा था.
विक्रम शर्मा को गोली मारने के बाद शूटर बाहर आए और बाइक पर सवार होकर फरार हो गए. अपनी सुरक्षा के लिए वह हमेशा लाइसेंसी पिस्तौल रखता था. लेकिन हमला इतना अचानक हुआ कि उसे हथियार निकालने का भी मौका नहीं मिला। पुलिस इस पूरे मामले को पुरानी रंजिश और गैंगवार से जोड़कर देख रही है. मामले की जांच के लिए एसटीएफ का गठन किया गया है. एसटीएफ झारखंड पुलिस के संपर्क में है. सूत्रों के अनुसार विक्रम शर्मा माफिया डॉन और फिलहाल दुमका जेल में बंद अखिलेश सिंह का आपराधिक गुरु था. 2017 में उसे जमशेदपुर पुलिस ने देहरादून से गिरफ्तार किया था। उस समय जमशेदपुर के एसएसपी अनूप टी मैथ्यू थे।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो