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jharkhand: आज भी क्यों नहीं मिटा डायन प्रथा का दाग, कोर्ट ने सरकार से पूछा सवाल, जानें डायन प्रथा का इतिहास  

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 11:31:11 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):झारखंड में डायन बिसाही के नाम पर लगातार हो रहे महिलाओं पर अत्याचार और हत्या के विरोध में झारखंड हाई कोर्ट अब सख्त हो चुका है.कोर्ट ने इस मामले पर स्वत संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है.

डायन बिसाही के नाम पर औरतों की हत्या पर हाईकोर्ट हुआ सख्त

झारखंड में लगातार डायन बिसाही के नाम पर औरतों की हत्या पर आज 9 मई मंगलवार को हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया है. और सरकार से सख्ती से इसके कारण, इसकी रोक के उपाय पर सवाल पूछा है. चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा और जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने सरकार से इस पर जवाब मांगा है. जिसमे सरकार को यह बताने को कहा गया है कि डायन प्रथा पर हाईकोर्ट की ओर से जो पहले निर्देश दिये गये है. उसका पालन किया गया है या नहीं. यदि पालन किया गया है तो किन-किन निर्देशों का पालन हुआ है.

कोर्ट ने 7 जुलाई तक सरकार को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का दिया निर्देश

अदालत ने 7 जुलाई तक सरकार को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश मिला है. सरकार ने निर्देश के बाद मामले में अब तक क्या-क्या कार्रवाई की है. कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है. कार्रवाई समय पर की जाती है या नहीं.पूरी सख्ती के साथ झारखंड सरकार को इस मामले पर जवाब मांगा गया है.

अंधविश्वास पर लोगों को जागरुक करने का दिया गया था निर्देश

आज भी क्यों डायन के नाम पर महिलाओं की हत्या की जाती है. उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. सरकार ने इसकी सूचना उपलब्ध कराने, अस्पताल सूचना देने का निर्देश दिया था. साथ ही गांव-गांव में जाकर स्थानीय भाषा में महिलाओं को डायन जैसे अंधविश्वास के प्रति जागरूकता अभियान चलाने को कहा था. और इस तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया गया था. जिस पर अब कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है.

झारखंड में डायन बिसाही के नाम पर 1050 महिलाओं की हत्या हुई है.

झारखंड को बिहार से अलग हुए 22 साल पूरे हो चुके हैं. और यह 23वां साल चल रहा है. बिहार से अलग होने के बाद झारखंड में कई क्षेत्रों में बहुत विकास किया गया. शहर के लोगों ने पढ़-लिखकर अपनी जिंदगी को बेहतर कर लिया है. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज लोग शिक्षा के अभाव में पुरानी मान्यताओं, अंधविश्वास को ज्यादा महत्व देते हैं, यही कारण है कि झारखंड में 22 साल के बाद भी तंत्र-मंत्र और जादू-टोना के नाम पर महिलाओं पर अत्याचार किया जाता है. और उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता है. अब तक झारखंड में 1050 महिलाओं की हत्या हुई है.

छुटनी देवी ने डायन प्रथा के खिलाफ लड़ी है लंबी लड़ाई

झारखंड में लोगों ने अंधविश्वास की आड़ में महिलाओं पर बहुत सारे जुल्म किए और उन्हें मौत के घाट उतार दिया. आपको बता दें कि झारखंड और बिहार के अलग होने से पहले 1995 में छुटनी देवी नाम की एक महिला पर पूरे गांव के लोगों ने डायन कहकर उसके साथ बहुत सारे जुल्म किए थे. और पड़ोस में बीमार बच्ची के तबीयत खराब होने के पीछे छुटनी देवी पर डायन होने का आरोप लगाकर 40 से 50 की संख्या में लोगों ने उसके घर पर धावा बोला, और उसे खींचकर घर से बाहर निकाल दिया. उसके कपड़े तक फाड़ दिये, बेरहमी से पीटा गया. उसके ऊपर मल-मूत्र फेंका गया. उसका गांव में रहना और जीना मुश्किल कर दिया. यहां तक कि छूटनी देवी के पति ने भी उसे छोड़ दिया था. रातों-रात तीन बच्चों के साथ वो गांव से नहीं भागी होती तो आज जिंदा नहीं होती.

आज भी नहीं मिटा झारखंड से डायन प्रथा का दाग

डायन के आरोप में पंचायत की ओर से पांच सौ का जुर्माना भी लगाया था. दबंगों के खौफ से छूटनी देवी ने जुर्माना तो भर दिया था. लेकिन फिर भी लोगों ने उस पर अत्याचार करना बंद नहीं किया. गांव से निकलने के बाद डायन प्रथा जैसे सामाजिक दाग के खिलाफ छुटनी देवी ने एक लंबी लड़ाई लड़ी. और एक वीरांगना के रूप में अपनी पहचान झारखंड में बनाई.

छुटनी देवी को पूर्व राष्ट्रपति ने सम्मानित भी किया था

आपको बताये कि छुटनी देवी सरायकेला खरसावां जिले के वीरबांस गांव की रहने वाली हैं. जिनको डायन प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने सम्मानित भी किया था. जिन्होंने सिर्फ अपने ही नहीं बल्कि झारखंड की लगभग 150 महिलाओं की जिंदगी को बचा लिया. छुटनी देवी  हर उस महिलाओं के लिए मसीहा बनी जिनको लोग डायन-भूतनी कहकर अत्याचार करते थे. लेकिन फिर भी झारखंड से पूरी तरह से डायन प्रथा का दाग नहीं मिटा पाई.

आज भी अंधविश्वास के नाम पर होता है महिलाओं पर जुल्म

आज भी आए दिन झारखंड में सुदूरवर्ती गांव के इलाकों से महिलाओं पर तंत्र-मंत्र जादू-टोना के नाम पर उन्हें मारने पीटने, मल-मूत्र खिलाने और उनको नंगा करके पीटने का भी मामला सामने आते रहता है. लेकिन फिर भी इस पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाया जा सका है. गांव में यदि किसी की तबीयत खराब हो जाए, या किसी के घर में कोई मर जाए तो, इसके पीछे डायन कहकर किसी भी महिला को शिकार बनाया जाता है. और उसे पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया जाता है. इस पर पुलिस और सरकार सख्ती से कार्यवाही नहीं करती है. जिसका परिणाम है कि आज भी झारखंड में डायन प्रथा कायम है.

रिपोर्ट-प्रियंका कुमारी

Tags:Jharkhand: Why even today the stain of witchcraft has not been erasedthe court asked the governmentknow the history of witchcraft

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