tnp desk: भाषा विवाद के बीच झारखंड में राज्यसभा का चुनाव भी आ गया है. यूं तो पहले से ही गठबंधन में शामिल झामुमो और कांग्रेस के रिश्ते में खटास की बातें सामने आती रही हैं. लेकिन अब राज्यसभा का चुनाव भी इस खटास की "परीक्षा" लेगा। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस एक सीट पर दावेदारी तो कर रही है, लेकिन वोट जुगाड़ कैसे होगा, इसका अभी ठोस प्रयास कहीं दिख नहीं रहा है. यह बात भी तय है कि महागठबंधन के सभी दल अगर एकजुट रहें , तो दोनों सीट निकाल सकते हैं. लेकिन ऐसा होगा, इसमें संदेह दिख रहा है.
दूसरी सीट के लिए चाहिए फुल सपोर्ट
एक सीट पर झामुमो का दावा स्वाभाविक है, तो दूसरी सीट पर कांग्रेस भी दावेदारी कर रही है. लेकिन कांग्रेस के लिए झामुमो का "फुल सपोर्ट" चाहिए, तभी परिणाम सार्थक हो सकते हैं. सूत्र बता रहे हैं कि झामुमो , राजद और वाम दल भी कांग्रेस के पक्ष में नहीं दिख रहे है. असम चुनाव में कांग्रेस ने भी झामुमो को झटका दिया था, तो बंगाल चुनाव में हेमंत सोरेन ने ममता बनर्जी के पक्ष में चुनाव प्रचार किया। इतना तो तय है कि कांग्रेस भले ही सीट का दावा कर रही है, लेकिन खुद की बदौलत आंकड़ा पाने में उसे कई परेशानियां हैं. सबसे बड़ी बात है कि कांग्रेस के 16 विधायक क्या करेंगे, यह अभी एक सवाल है.
प्रदीप बलमुचू और सुबोध कान्त सहाय भी रेस में
अभी तक उम्मीदवारों के नाम भी तय नहीं हुए हैं. वैसे कांग्रेस नेता प्रदीप कुमार बालमुचू ने कहा है कि पार्टियों को जल्द उम्मीदवार के नाम तय कर लेने चाहिए। वैसे, सूत्र बता रहे हैं कि सुबोधकांत सहाय और प्रदीप कुमार बालमुचू भी राज्यसभा के लिए चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं. राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता के 27 वोट चाहिए। झामुमो अपने बल पर तो यह आंकड़ा प्राप्त कर सकता है, लेकिन दूसरी सीट के लिए उसे भी कांग्रेस की जरूरत पड़ेगी। भाजपा भी उम्मीदवार देने की बात कह रही है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अगर महागठबंधन के दल सबको एकजुट रख सके तो दूसरी सीट निकालना भी बहुत कठिन नहीं होगा, लेकिन यह अभी भी यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि क्या महा गठबंधन के सभी दल एकजुट रहेंगे??