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Jharkhand Politics: पार्टी की बागडोर किसके हाथों में हो, इसको लेकर भाजपा क्यों है दुविधा में, पढ़िए इस रिपोर्ट में

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
Published: December 7, 2024,
Updated: 4:20 PM

धनबाद(DHANBAD): झारखंड विधानसभा चुनाव में 2019 से भी खराब प्रदर्शन करने वाली बीजेपी आगे की राजनीति को लेकर दुविधा में है .आगे के लिए किसे बागडोर दिया जाय,इसको लेकर गंभीर मंथन का दौर शुरू है. हार के कारणों की समीक्षा के बाद बागडोर का सवाल बड़ा हो गया है.ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि 9 से 12 दिसंबर तक विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है. लेकिन नेता प्रतिपक्ष के नाम को लेकर भाजपा कोई सक्रियता नहीं दिखा रही है. पिछली बार नेता प्रतिपक्ष रहे अमर कुमार बाउरी तक  चुनाव हार गए हैं .अब कोई नया नेता प्रतिपक्ष बन सकता है. बीजेपी झारखंड में अगले 5-10 साल की राजनीति को ध्यान में रखकर बागडोर किसी के हाथ में देने की सोच पर काम कर रही है.

2019 में ओबीसी  को मुख्यमंत्री  बनाने भी पार्टी को कोई फायदा नहीं हुआ. मुख्यमंत्री रहते हुए रघुवर दास चुनाव हार गए. उसके बाद 5 साल तक भाजपा विपक्ष में रही .उस समय भाजपा को लगा कि रघुवर दास को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय सही नहीं रहा. उसके बाद बाबूलाल मरांडी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान दी गई. सोचा गया होगा कि आदिवासी नेता के प्रदेश अध्यक्ष रहते चुनाव में जाने से पार्टी को लाभ होगा. लेकिन चुनाव परिणाम में ऐसा कुछ दिखा नहीं.यह भी कहा जाता है कि भाजपा में बाहर के नेताओं ने चुनाव को हाइजैक कर लिया था.

किसके हाथ में पार्टी की बागडोर सौंपेगी भाजपा

इधर, घोषणा की गई है कि फरवरी में प्रदेश भाजपा संगठन में बदलाव होगा .हो सकता है कि प्रदेश अध्यक्ष को बदल दिया जाए. और शायद इसी निर्णय की वजह से नेता प्रतिपक्ष के नाम को लेकर भाजपा फिलहाल शिथिल दिख रही है. संगठन में अगर बदलाव होता है ,तो नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी बाबूलाल मरांडी को मिल सकती है. वैसे 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कड़ी मेहनत की, लेकिन पार्टी के एजेंडे ही उसपर भारी पड़ गए.भाजपा को मात्र 21 सीटों से संतोष करना पड़ा. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनाव प्रभारी बनाया गया और असम के मुख्यमंत्री हिमांता  विश्व शरमा को चुनाव सह प्रभारी बनाया गया. टिकट बंटवारे को लेकर भी खींचतान हुई. भाजपा इस बार अपने पुराने विधायकों पर ही भरोसा किया. लेकिन उनमें से कई भरोसे पर खरे नहीं उतरे. अब भाजपा झारखंड में 5-10 साल की योजना को ध्यान में रखते हुए किसके हाथ में बागडोर देती है. यह देखने वाली बात होगी.

रिपोर्ट : धनबाद ब्यूरो 

Tags:Jharkhand newsJharkhand politicsBjp partyPolitical newsPoliticsBabulal marandiLeader of the Opposition

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