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Jharkhand Politics: झारखंड को सबसे अधिक सीएम देनेवाले कोल्हान में भाजपा और झामुमो की क्या है आगे की राजनीति, पढ़िए इस रिपोर्ट में 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 1:46:40 PM

धनबाद(DHANBAD): कोल्हान में भाजपा को सीट बढ़ाना उसकी मजबूरी भी है तो यह काम असम के मुख्यमंत्री हिमांता विश्व शर्मा की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गई है. असम के मुख्यमंत्री कोई भी ऐसा कसर नहीं छोड़ना चाहते, जिससे कोल्हान में भाजपा की राजनीति पर कोई असर पड़े. बात सिर्फ चंपाई सोरेन की ही नहीं है, जमशेदपुर की पूर्व सांसद आभा महतो को भी भाजपा की राजनीति में मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास हो रहा है . शायद यही वजह है कि 15 सितंबर को प्रधान मंत्री के दौरे के पहले हिमांता विश्व सरमा आभा महतो के घर भी गए थे .इसका परिणाम हुआ की 15 सितंबर को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में आभा महतो मौजूद दिखाई दी. तो क्या कहा जा सकता है कि आभा महतो और उनके पति शैलेंद्र महतो की राजनीति मुख्य धारा में लौटने वाली है.

आभा महतो  के बहाने महतो वोट को साधने की कोशिश 

आभा महतो जमशेदपुर से दो बार की सांसद रह चुकी है. लेकिन विद्युत वरण महतो के झारखंड मुक्ति मोर्चा से भाजपा में जाने के बाद उनकी राजनीति हाशिए पर चली गई. कोल्हान में आदिवासियों को साधने के लिए चंपाई सोरेन को भाजपा में शामिल करने की योजना बनाई गई और उसे क्रियान्वित किया गया. तो आभा महतो  के बहाने महतो वोट को साधने की कोशिश भाजपा कर रही है .यह अलग बात है कि 15 सितंबर के पहले यह चर्चा थी कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के कुछ विधायक प्रधानमंत्री के सभा में भाजपा का दामन थाम सकते हैं. लेकिन यह चर्चा निर्मूल साबित हुई. प्रधानमंत्री रांची से 130 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर जमशेदपुर पहुंचे और उन्होंने वहां जनसभा को संबोधित किया. उनके जनसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा और हेमंत सोरेन निशाने पर रहे.

भाजपा की नज़र कोल्हान सीट पर 

भाजपा यह जानती है कि कोल्हान को साधे बिना भाजपा सरकार नहीं बना सकती है .इसलिए भी कोल्हान पर विशेष जोर दिया जा रहा है. कोल्हान ऐसा क्षेत्र है, जो झारखंड में सबसे अधिक मुख्यमंत्री दिया है .चाहे अर्जुन मुंडा हो या रघुवर दास हो या चंपाई सोरेन हो या मधु कोड़ा हो, सभी कोल्हान से ही आते हैं. कोल्हान में विधानसभा के कुल 14 सीटें हैं. 2019 के चुनाव में भाजपा के हाथ एक भी सीट नहीं आई. 11 सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का कब्जा रहा, दो सीटों पर कांग्रेस जीती और एक सीट पर निर्दलीय की जीत हुई. 2019 में तो भाजपा का कोल्हान में यह हाल हुआ कि मुख्यमंत्री रहते हुए रघुवर दास चुनाव हार गए. यह बात भी अब लगभग साफ हो गई है कि चंपाई सोरेन को भाजपा में शामिल करने में असम के मुख्यमंत्री की बड़ी भूमिका रही है. चंपाई सोरेन के मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटने के साथ ही हिमांता विश्व शर्मा का प्रेम चंपाई सोरेन के प्रति उमड़ने लगा था. चंपाई सोरेन के मन में कुर्सी जाने की जो आग थी, उसे भाजपा ने प्रज्वलित किया और अंतत वह भाजपा में शामिल हो गए.

जानिए कोल्हान में भाजपा को कितनी सीट मिल सकती है 

अब सवाल बड़ा है कि चंपाई सोरेन के भाजपा में जाने से भाजपा को कितना लाभ मिलेगा. कोल्हान को जानने वाले राजनीतिक पंडित बताते हैं कि भाजपा को चंपाई सोरेन की एक सीट मिल सकती है. इसके अलावे अगर बहुत जमीन पर काम होगा तो दो सीट और मिल सकती है. यानी भाजपा 14 में तीन सीट जीत सकती है. हालांकि यह चुनाव के पहले का आकलन है. चुनाव आते-आते क्या दृश्य होगा ,इसका सिर्फ अंदाज ही लगाया जा सकता है. वैसे चंपाई सोरेन का उपयोग भाजपा संथाल परगना में भी करने की रणनीति पर काम कर रही है.

चंपाई सोरेन संथाल परगना का दौरा भी कर चुके हैं. वह आदिवासियों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा  अपने मूल्यों से भटक गया है और भाजपा ही आदिवासियों के हित में काम करने वाली एकमात्र पार्टी है. जो भी हो लेकिन यह कहा जा सकता है कि कोल्हान में भाजपा की सफलता पर ही चंपाई सोरेन और हिमांता विश्व शर्मा की राजनीति झारखंड में सफल या असफल होगी. वैसे झामुमो भी कोल्हान पर नजर गड़ाए हुए है. कोल्हान की बदली राजनीति के बीच हेमंत सोरेन लगभग पांच बार कोल्हान का दौरा कर चुके है.कोल्हान के सभी झामुमो विधायकों के साथ उनका सीधा संवाद जारी है.

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