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WEF में झारखंड का दमदार दावा: क्रिटिकल मिनरल्स से बनेगा ग्लोबल पावरहाउस, निवेशकों को खुला न्योता

BY -
Vinita Choubey  CE
Vinita Choubey CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 22, 2026, 6:45:37 PM

रांची (RANCHI): ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के इंडिया पवेलियन में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. यहां आयोजित एक उच्चस्तरीय वैश्विक राउंड टेबल बैठक में झारखंड ने क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर अपनी दूरदर्शी और दीर्घकालिक रणनीति दुनिया के सामने रखी.

“झारखंड की क्रिटिकल मिनरल्स अवसर: भूविज्ञान से मूल्य सृजन तक” विषय पर हुई इस बैठक में नीति-निर्माता, शोध संस्थान, अंतरराष्ट्रीय उद्योग जगत, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए. चर्चा का फोकस इस बात पर रहा कि खनिज-समृद्ध क्षेत्र कैसे पारंपरिक खनन से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, विनिर्माण और तकनीक आधारित औद्योगिक विकास के वैश्विक केंद्र बन सकते हैं.

क्रिटिकल मिनरल्स के इकोसिस्टम में झारखंड की खास भूमिका

झारखंड सरकार के सचिव अरवा राजकमल ने कहा कि मौजूदा दौर में क्रिटिकल मिनरल्स सिर्फ औद्योगिक संसाधन नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और आर्थिक सुरक्षा का अहम आधार बन चुके हैं. उन्होंने बताया कि भारत के कुल खनिज भंडार का बड़ा हिस्सा झारखंड में है, जिससे राज्य क्रिटिकल मिनरल्स इकोसिस्टम को दिशा देने की विशिष्ट स्थिति में है. उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा चिन्हित 24 क्रिटिकल मिनरल्स में से 20 झारखंड में उपलब्ध हैं. यही वजह है कि झारखंड भारत के ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एडवांस्ड मैटीरियल्स और स्वच्छ तकनीकों से जुड़े दीर्घकालिक लक्ष्यों के केंद्र में है.

अब कच्चे माल से आगे, वैल्यू क्रिएशन पर जोर

एवरसोर्स कैपिटल के चेयरमैन और भारत सरकार के पूर्व वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि खनिज-समृद्ध राज्यों को सिर्फ कच्चे संसाधन बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और औद्योगिक उपयोग से रोजगार, उद्योग और अर्थव्यवस्था को लंबी मजबूती मिल सकती है. उन्होंने विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के संतुलन पर भी जोर दिया.

अगली पीढ़ी की अर्थव्यवस्था की तैयारी

जियाडा (JIIDCO) के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन ने उद्योग जगत का नजरिया रखते हुए मुख्यमंत्री के विजन 2050 के तहत झारखंड की औद्योगिक रणनीति को सामने रखा. उन्होंने बताया कि राज्य अब उत्खनन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर वैल्यू-बेस्ड इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है. इसमें खास तौर पर खनिज प्रसंस्करण और परिष्करण, इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपोनेंट्स, मैग्नेट और एडवांस्ड मैटीरियल्स, बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों पर फोकस किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल क्लस्टर निवेश को आकर्षित करने और देश की क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन को मजबूत करने में मददगार होंगे.

निवेशकों को खुला न्योता

झारखंड सरकार के खनन निदेशक राहुल सिन्हा ने राज्य के क्रिटिकल मिनरल परिदृश्य की जानकारी दी और अन्वेषण व खनन को बढ़ावा देने के लिए चल रही सरकारी पहलों पर प्रकाश डाला. उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड एक पारदर्शी और निवेश-अनुकूल माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और देश-विदेश के सभी हितधारकों से साझेदारी का आह्वान किया.

ज्ञान, कौशल और संस्थागत ताकत पर जोर

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी के निदेशक डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि सिर्फ संसाधनों की मौजूदगी काफी नहीं है. झारखंड को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च सहयोग और मजबूत संस्थागत ढांचे की जरूरत है. बैठक में डेनिस ने सतत खनिज विकास के लिए मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता को सबसे अहम बताया. उन्होंने इन-हाउस विश्वविद्यालय, रिसर्च इकोसिस्टम और अधिकारियों व छात्रों के प्रशिक्षण को दीर्घकालिक सफलता की नींव बताया.

डीएमटी ग्रुप के प्रतिनिधि लुकास ने बताया कि निवेशकों के लिए नियामकीय स्पष्टता, जोखिम प्रबंधन और ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) मानक बेहद अहम हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि आज निवेश का भरोसा सिर्फ खनिज पर नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया पर टिका होता है.

वैश्विक सप्लाई रिस्क और रणनीतिक खनिज

साइन रिसोर्सेज ग्रुप के बेन ने बताया कि क्रिटिकल मिनरल्स का वैश्विक उत्पादन कुछ गिने-चुने इलाकों तक सीमित है. उदाहरण के तौर पर, दुनिया का लगभग 80% पोलुसाइट (सीजियम अयस्क) सिर्फ एक खदान से आता है, जो सप्लाई चेन को जोखिम में डालता है.

Tags:Jharkhand makes a strong case at WEFCritical mineralsglobal powerhouseinvestors are openly invitedCM hemant soren

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