टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : झारखंड शराब घोटाले में IAS विनय चौबे पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिनमें उत्पाद विभाग के टेंडर में अनियमितता और छत्तीसगढ़ सिंडिकेट से मिलीभगत शामिल है; इसी मामले में IAS कर्ण सत्यार्थी सहित कई अधिकारियों ने कोर्ट में बयान दर्ज कराए हैं, जबकि IAS अमित कुमार ने मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत बयान में खुलासा किया है कि विनय चौबे के मौखिक आदेश पर टेंडर दिए गए और भुगतान हुए. जिससे राज्य को करोड़ों का नुकसान हुआ है. वहीं अब इस मामले में आईएएस विनय चौबे के खिलाफ आईएएस कर्ण सत्यार्थी ने गंभीर आरोप लगाते हुए पूर्वी सिंहभूम के डीसी कर्ण सत्यार्थी ने भी रांची सिविल कोर्ट परिसर स्थित न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 183 के तहत अपना बयान दर्ज कराया. कर्ण सत्यार्थी पूर्व में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के आयुक्त उत्पाद सह झारखंड स्टेट बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के पद पर रहे हैं. उन्होंने भी अपने बयान की कॉपी सीलबंद करके सौंपा है.
बताया गया है कि अपने बयान में कर्ण सत्यार्थी ने शराब घोटाले के पीछे पूर्व उत्पाद सचिव विनय चौबे की भूमिका की जानकारी दी है. उल्लेखनीय है कि ACB पहले ही कर्ण सत्यार्थी से इस मामले में लगातार तीन दिनों तक पूछताछ कर चुकी है. हालांकि, कर्ण सत्यार्थी पर भी गंभीर आरोप हैं. उन पर आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान शराब की खुदरा दुकानों में फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर मैनपावर आपूर्ति का ठेका लेने वाली दो प्लेसमेंट एजेंसियों-मेसर्स मार्शन और मेसर्स विजन के खिलाफ, मामला उजागर होने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. न तो प्राथमिकी दर्ज कराई गई और न ही कोई कानूनी कदम उठाया गया.
इतना ही नहीं, उनके कार्यकाल में प्रदेश में एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बिक्री के मामले भी सामने आते रहे, लेकिन उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई. गौरतलब है कि 15 दिसंबर को भी उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व उत्पाद आयुक्त IAS अमित कुमार ने न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष BNSS की धारा 183 के तहत अपना बयान दर्ज कराया था, जिसकी प्रति भी सीलबंद कर सौंपी गई है. इस तरह झारखंड शराब घोटाले में लगातार सामने आ रहे खुलासों और अधिकारियों के बयानों से मामले की जांच और तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है.
