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जमशेदपुर अपहरणकांड: क्यों झारखंड पुलिस सवालों में,क्या कैरव गांधी को आसमान खा गया या धरती निगल गई?

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 22, 2026, 4:10:55 PM

धनबाद(DHANBAD):  झारखंड पुलिस सवालों के घेरे में है. काबिलियत की अग्नि परीक्षा हो रही है.   13 जनवरी को जमशेदपुर से किडनैपड  युवा उद्योगपति कैरव  गांधी के संबंध में पुलिस को अभी तक सुराग नहीं मिला है. पुलिस पानी पीट रही है.  अपहरण हुआ 13 जनवरी को और आज 22 जनवरी है.  पुलिस लगातार सक्रियता का दावा कर  रही है.  लेकिन अपहरण कर्ता  इतने शातिर और प्रोफेशनल हैं  कि पुलिस को लगातार चकमा दे रहे हैं.   बड़ा सवाल है कि कैरव  गांधी को  अपहरणकर्ता  कहां छुपा कर रखे हैं? क्या एक प्रदेश की पुलिस पर अपहरणकर्ता  भारी पड़ रहे हैं? यह  अलग बात है कि संदेह  बिहार के अपहरणकर्ता  गिरोह  की तरफ जा रहा है.  क्या जेल में बंद किसी अपहरणकर्ता  गिरोह यह कांड  किया है.  ऐसे कई सवाल हैं, जो इस अपहरण कांड के बाद उठ  रहे हैं, लेकिन पुलिस के हाथ कुछ लग नहीं रहा है. 

कैरव   गांधी का अपहरण, सूत्रों के अनुसार पुलिस का  बोर्ड लगी सफेद स्कॉर्पियो से की गई है.  सूत्र बताते हैं कि सफेद स्कॉर्पियो को आखिरी बार बुंडू टोल प्लाजा पर देखा गया था.  इसके बाद से गाड़ी का कोई पता नहीं चल रहा है.  अनुमान किया जा रहा है कि अपराधी कैरव  गांधी को लेकर लोहरदगा- गढ़वा रोड होते हुए उत्तर प्रदेश या बिहार चले गए होंगे।  फिलहाल जमशेदपुर पुलिस और एसटीएफ की टीम  इस मामले में लगी हुई है.  सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्य के आधार पर पुलिस गिरोह  तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.  यह माना जा रहा है कि यह किडनैपिंग बड़े शातिराना  अंदाज से किया गया है.  हो सकता है कि अपराधियों ने पहले खुद को पुलिस बताया हो और उसके बाद से वारदात को अंजाम दिया हो.  

इस घटना से उद्योग जगत हिल गया है.  अब लोगों में दहशत  और चिंता बढ़ रही है.  दरअसल, 13 जनवरी को कदमा -सोनारी  लिंक रोड से कैरव  गांधी का अपहरण हुआ.  कुछ देर बाद सरायकेला  इलाके में कैरव  गांधी की कार  लावारिस हालत में मिली।  गाड़ी में चाबी लगी हुई थी. बता दे कि  एक समय था जब बिहार में अपहरण उद्योग का रूप ले चुका था.  लेकिन 2005 के बाद जब नीतीश कुमार की सरकार बनी, तो अपहरण उद्योग पर लगभग काबू पा लिया गया था.  सभी बड़े गिरोह के सरगना  और बाहुबली सलाखों के पीछे भेज दिए गए थे.  इधर, जैसी की सूचना है कुछ अपहरण कर्ता  गिरोह  फिर सक्रिय हो गए हैं और अपहरण कांड को अंजाम दे रहे हैं. 

 जिस तरह से कैरव  गांधी का अपहरण हुआ है, पुलिस को अब अजय सिंह गिरोह पर संदेह हो रहा है.  वह औरंगाबाद का रहने वाला है और कई बड़े अपहरण कांडों में उसका  गैंग शामिल रहा है.  सूत्र बताते हैं कि उसका तरीका भी वही रहता है, जैसा कैरव  गांधी के अपहरण में अपनाया गया है.  लोग बताते हैं कि अजय सिंह का नेटवर्क बिहार, झारखंड, बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात तक फैला है. जांच में पता चला है कि अपहरण में इस्तेमाल स्कॉर्पियो पर JH 12A 4499 नंबर प्लेट लगी थी.  परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, यह नंबर असल में एक पुरानी बोलेरो का है, जो नालंदा के राजगीर स्थित 'नई पोखर' के राजशेखर के नाम पर दर्ज है. यह गाडी बहुत पुरानी है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो

Tags:DhanbadJharkhandJamshedpurKidnappingNo Trace

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