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सदका ए फ़ित्र सभी मुसलमान पुरुषों व महिलाओं को अदा करना जरूरी, अल्लाह को छिपी हुई इबादत आती है पसंद: मौलाना अहमद अली खान

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 8:12:51 PM

पलामू(PALAMU): रमजान उल मुबारक के महीने में रोजा रखने के साथ अल्लाह की इबादत में मुस्लिम समुदाय अकीदत के साथ मशगूल हैं. रोजेदार विभिन्न मस्जिदों में बड़े ही अकीदत व मोहब्बत के साथ विशेष तरावीह में शामिल हो रहे हैं. पांच वक्त की नमाज में भी रमजान के मौके पर मस्जिदें रोजेदार नमाजियों से भरी रहती है. रमजान उल मुबारक के दूसरे जुमा में भाई बिगहा बड़ी मस्जिद के पेश इमाम मौलाना अहमद अली खान रजवी ने अपनी तकरीर में कहा कि सदका ए फित्र अदा करना सभी मुसलमान भाई-बहन को जरूरी है. उन्होंने कहा कि सामान्य लोग 2.45 किलो गेहूं की कीमत लगभग 70 रुपए प्रति व्यक्ति अदा करेंगे. लेकिन जिन्हे अल्लाह पाक ने नवाजा है, वह 490 ग्राम जव, 490 ग्राम खजूर या 490 ग्राम किशमिश की कीमत अदा करें तो बेहतर होगा. इससे गरीबों मिस्किनो की जरूरतें काफी हल हो जाती हैं.

मौलाना अहमद अली खान रजवी ने कहा कि अल्लाह छिपी हुई इबादत ज्यादा पसन्द करता है. इस लिए रोजे की नुमाइश से बचना चाहिए. मौलाना अहमद अली खान रजवी ने कहा कि रोजेदारों को चाहिए कि रोजे के दौरान जिस्म का हर अंग गुनाह और बुरी हरकत से बचा रहे. महज भूखा प्यासा रहना रोजा की सूरत नहीं है, तकवा भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि पैगम्बर ए इस्लाम ने फरमाया है कि कुछ रोजेदार ऐसे होते हैं जिन्हें भूख प्यास के सिवा कुछ हासिल नहीं होता. इस्लाम जिस रोजा की हिदायत देता है वह यह है की हम ऐसे अमल करें जिससे अल्लाह और उसके रसूल राजी हो जाएं. रोजेदार खुद को ऐसे ढाल लें जैसे एक आशिक अपने महबूब को खुश करने के लिए भूखा, प्यासा दुनिया की लज्जतों से बेगाना बना हुआ है.  

मौलाना ने कहा कि रोजा एक अजीमुश्शान इबादत है, जिसका सभी को एहतराम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि उन सभी लोगों को अपने माल का जकात अदा करना फर्ज है, जो इसके दायरे में आते हैं. उन्होंने कहा कि जकात अदा नहीं करने या उसमे थोड़ा सा भी कम अदा करने का हुक्म नहीं. उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर जकात फर्ज है उन्हें अपने माल व दौलत, सोना चांदी रुपया पर 2.5 प्रसेंट जकात निकलना फर्ज है. 

उन्होंने कहा कि यह अल्लाह का कानून है, इसकी खिलाफवर्जी की बड़ी सजा है. उन्होंने कहा कि सभी दिन अपने आस पास के लोगों की हालत जानना और जरूरत पर उन्हें मदद करने का हुक्म है. मगर रमजान उल मुबारक के मौके पर अपने पड़ोसियों रिश्तेदारों मिसकिनो की मदद करने से उसका सवाब 70 गुणा बढ़ जाता है. उन्होंने आम मुसलमानों को ठहर ठहर कर कुरान पाक रोज पढ़ने और उसे समझने की बात कही. उन्होंने कहा कि इस तरह कुरान शरीफ को पढ़ने का सवाब तो मिलेगा ही, लोग गलत कामों से बच भी जायेंगे. क्योंकि, बहुत सारी गैर जरूरी चीजें लोग जानकारी के अभाव में करते हैं, जिसका वह अजाब बटोर लेते हैं. बचने के लिए इस्लाम और कुरआन को समझना जरूरी है.

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