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देवघर से पांकी, तोरण द्वार के बहाने गैर आदिवासी मतों का ध्रुवीकरण की साजिश तो नहीं

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 9:51:29 PM

रांची(RANCHI): झारखंड की राजनीति में इन दिनों तोरण द्वार काफी चर्चा में है, एक तरफ बाबा की नगरी देवघर में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने परंपरागत रुप से महाशिवरात्रि पर आयोजित होने वाले शिव बारात को एक बड़ा मुद्दा बना दिया है.

हिन्दु भावनाओं के साथ खिलवाड़

सांसद निशिकांत दुबे का दावा है कि जिला प्रशासन के द्वारा रुटों के निर्धारण में मनमर्जी की गयी है, निषेधाज्ञा लगाकर और तोरण द्वार की ऊंचाई को निर्धारित करने की कोशिश कर हिन्दु भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया है. जबकि प्रशासन का तर्क था कि सभी परंपरागत रुटों पर जुलूस निकालने की अनुमति है, लेकिन प्रशासन गैर परंपरागत रुटों पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दे सकती.

निशिकांत दुबे की याचिका खारिज

इधर निशिकांत दुबे की जिद जुलूस को पूरे शहर में घूमाने की थी, इस मामले में एक उनके द्वारा जनहित याचिका के माध्यम से कोर्ट का दरवाजा भी खटखटया, लेकिन झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. साथ ही जिला प्रशासन ने कोर्ट में यह भी कहा कि सांसद के द्वारा 144 लगाये जाने का दावा तथ्यहीन है.

देवघर की आंच पांकी तक पहुंची, गरमाया तोरण द्वारा का मुद्दा

लेकिन, जब एक तरफ देवघर के मुद्दे का समाधान ढूंढ़ने की कोशिश की जा रही थी, ठीक उसी वक्त बाबा नगरी से करीबन 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पलामू जिले का पांकी प्रखंड में तोरण द्वार को लेकर बवाल हो गया.

बताया जा रहा है कि एक महाशिव रात्रि को लेकर जब एक सम्प्रदाय विशेष के द्वारा तोरण द्वार का निर्माण किया जा रहा था, जिसका  दूसरे पक्ष के द्वारा विरोध किया गया, साथ ही और तोरण द्वार को उखाड़ कर फेंक दिया गया, जिसके बाद दोनों पक्षों में भिंड़त हो गयी, जमकर पत्थराबाजी हुई, आखिरकार प्रशासन को इस इलाके में इंटरनेट की सेवा बंद करनी पड़ी.

अभी भी वहां दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति कायम है, प्रशासन की ओर से सतर्कता बरतते हुए 144 लागू कर दिया गया है, साथ ही 1200 पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती कर दी गयी है.

AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की इंट्री

इस बीच पांकी में हुई हिंसा पर AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी का ने भी मोर्चा खोल दिया, असदुद्दीन ओवैसी ने इसे प्रशासनिक चूक बताते हुए कहा कि इसके पहले कभी भी जामा मस्जिद के सामने तोरण द्वार नहीं बनाया गया, यह पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता है, जिसके तुरंत बाद इस मामले में केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की भी इंट्री हो गयी, उन्होंने इस मामले को हिन्दू भावनाओं से जोड़ते हुए यह बयान दे दिया कि महाशिवरात्रि के अवसर पर हिन्दुस्तान में तोरण द्वार नहीं बनेगा तो क्या बांग्लादेश और पाकिस्तान में बनेगा.

गैर आदिवासी हिन्दू मतों का ध्रुवीकरण की साजिश

साफ था कि इन ये सारे बयानों का एक राजनीतिक मकसद था, शांति स्थापित करने की कोशिशों को पलीता लगाना था. वहीं इस मामले  में कुछ लोगों का कहना है कि दो सम्प्रदायों में दरार पैदा करने की यह कोशिश राज्य में गैर आदिवासी हिन्दू मतों का ध्रुवीकरण की साजिश हो सकती है, जिससे कि हेमंत सरकार को हिन्दू विरोधी साबित कर आगे अपनी राजनीतिक जमीन तैयार किया जा सकें.

रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार

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